छत्तीसगढ़ के गांवों में अब 15 कार्यदिवस में बनेगा विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र, पंचायत सचिव की तय हुई जिम्मेदारी

रायपुर | छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए अब लोगों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने इस सेवा को लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 के दायरे में शामिल करते हुए आवेदन के निराकरण के लिए 15 कार्यदिवस की समय-सीमा निर्धारित की है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव को आवेदन प्राप्त होने के 15 कार्यदिवस के भीतर सेवा उपलब्ध करानी होगी।

इस फैसले से ग्रामीणों को विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। निर्धारित समय-सीमा लागू होने से आवेदन के निराकरण में देरी पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।

पंचायत सचिव होंगे जिम्मेदार, एसडीओ और कलेक्टर को मिली भूमिका

नई व्यवस्था के तहत विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव को पदाभिहित अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) को सक्षम अधिकारी और जिला कलेक्टर को अपीलीय प्राधिकारी बनाया गया है।

इस व्यवस्था के तहत निर्धारित समय-सीमा में सेवा नहीं मिलने पर आवेदक संबंधित प्रावधानों के अनुसार सक्षम अधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकेंगे। इससे सेवा में देरी होने की स्थिति में शिकायत और निराकरण के लिए एक निर्धारित प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।

ग्रामीण परिवारों को मिलेगी सुविधा

विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसकी जरूरत विभिन्न सरकारी योजनाओं, कानूनी प्रक्रियाओं और अन्य आवश्यक कार्यों में पड़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इस प्रमाण-पत्र के लिए कई बार पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और पैसे दोनों खर्च होते हैं।

अब 15 कार्यदिवस की समय-सीमा तय होने से लोगों को प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए निर्धारित अवधि का लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण परिवारों को अपने जरूरी दस्तावेज समय पर बनवाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

समयबद्ध सेवाओं पर जोर

लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत सेवा की समय-सीमा निर्धारित करने का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाएं तय अवधि में उपलब्ध कराना और देरी की स्थिति में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र को इस दायरे में शामिल किए जाने से ग्रामीण स्तर पर सेवा वितरण की प्रक्रिया अधिक समयबद्ध बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।

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