छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटें 90 से बढ़कर 135 होने की चर्चा, महिलाओं के लिए 45 सीटें आरक्षित होने की संभावना

Chhattisgarh Women Reservation: छत्तीसगढ़ में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विधानसभा की मौजूदा 90 सीटों की संख्या बढ़कर 135 हो सकती है। यदि सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है और महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान लागू होता है, तो 135 सदस्यीय विधानसभा में महिलाओं के लिए 45 सीटें आरक्षित हो सकती हैं। हालांकि, यह फिलहाल संभावित गणना है। सीटों की संख्या और आरक्षण की वास्तविक स्थिति संबंधित विधेयक के प्रावधानों और आगे की विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

90 से बढ़कर 135 हो सकती हैं विधानसभा सीटें

छत्तीसगढ़ विधानसभा में वर्तमान में 90 सीटें हैं। प्रस्तावित परिसीमन के तहत सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर यह आंकड़ा 135 तक पहुंच सकता है। इस स्थिति में प्रदेश में 45 नए विधानसभा क्षेत्र बनने की संभावना होगी।

परिसीमन की प्रक्रिया के तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण किया जा सकता है। इससे कुछ मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदल सकती हैं और नए क्षेत्र अस्तित्व में आ सकते हैं। हालांकि, नए निर्वाचन क्षेत्रों की वास्तविक संख्या और उनकी सीमाएं आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।

महिला आरक्षण लागू हुआ तो 45 सीटों पर मिलेगा अवसर

विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने के साथ महिला आरक्षण को लेकर भी चर्चा हो रही है। यदि कुल 135 सीटें होती हैं और एक-तिहाई सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू होता है, तो गणना के अनुसार 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।

इस बदलाव से प्रदेश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के नए अवसर बन सकते हैं। राजनीतिक दलों को भी महिला उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को लेकर अपनी तैयारियों में बदलाव करना पड़ सकता है।

हालांकि, आरक्षण किन निर्वाचन क्षेत्रों में लागू होगा और इसका वास्तविक स्वरूप क्या रहेगा, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों और प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

भाजपा-कांग्रेस समेत सभी दलों की बदलेगी चुनावी रणनीति

यदि विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ती है, तो इसका असर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति पर भी पड़ सकता है। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य दलों को नए विधानसभा क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

रायपुर और दुर्ग जैसे शहरी क्षेत्रों से लेकर बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ इलाकों तक परिसीमन का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। नए निर्वाचन क्षेत्र बनने से स्थानीय नेताओं को आगे आने का अवसर मिल सकता है, जबकि मौजूदा विधायकों को बदली हुई सीमाओं और सामाजिक समीकरणों के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करनी पड़ सकती है।

परिसीमन के आधार पर अभी स्थिति स्पष्ट होना बाकी

परिसीमन आयोग के पूर्व सदस्य सुशील त्रिवेदी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रस्तावित परिसीमन में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने और वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाने की चर्चा है। हालांकि, परिसीमन का अंतिम आधार और सीटों के निर्धारण की प्रक्रिया संबंधित विधेयक के प्रावधानों से ही स्पष्ट होगी।

इसलिए प्रस्तावित बदलावों को अभी अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता। सीटों की संख्या, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों की पुष्टि आधिकारिक निर्णय के बाद ही होगी।

विधेयक के प्रावधानों पर टिकी निगाहें

छत्तीसगढ़ में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर आगे की प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो प्रदेश की चुनावी राजनीति और महिला प्रतिनिधित्व के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकते हैं।

फिलहाल 90 से 135 विधानसभा सीटें होने और महिलाओं के लिए 45 सीटें आरक्षित होने की संभावना प्रस्तावित गणना पर आधारित है। अंतिम तस्वीर विधेयक के प्रावधानों और संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

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