ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बातचीत की कोशिश, हॉर्मुज पर अटकी निगाहें

Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी संपर्क की कोशिशें तेज हो गई हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी के बावजूद पर्दे के पीछे मध्यस्थों के जरिए बातचीत का रास्ता तलाशा जा रहा है। इस बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान की शर्तें संभावित समझौते में अहम मुद्दा बन गई हैं।

UNGA में पेजेशकियन का संदेश- दबाव के आगे नहीं झुकेंगे

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि उनका देश अमेरिकी दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीति का रास्ता खुला है। उनका कहना था कि बातचीत धमकी या सैन्य दबाव के माहौल में नहीं होनी चाहिए।

पेजेशकियन का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के UNGA संबोधन के एक दिन बाद आया, जिसमें ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता नहीं होने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद न्यूयॉर्क में अमेरिकी और ईरानी पक्ष के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत हुई।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना बातचीत का अहम मुद्दा

ईरान-अमेरिका संकट में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बन गया है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। रॉयटर्स के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटाता है, तो तेहरान लगभग एक सप्ताह के भीतर जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर विचार कर सकता है।

ईरान की ओर से युद्ध समाप्त करने के प्रस्ताव में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और जमे हुए ईरानी धन को मुक्त करने जैसे मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच इन शर्तों और संघर्ष समाप्त करने के तरीके को लेकर अभी भी काफी अंतर बना हुआ है

बातचीत जारी, लेकिन मतभेद बरकरार

रॉयटर्स के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि दोनों देश अभी भी युद्ध समाप्त करने के तरीके को लेकर काफी दूर हैं। हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहना चाहिए। इससे संकेत मिलता है कि सैन्य तनाव के बीच बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

क्षेत्रीय देशों की भी सक्रिय भूमिका

ईरान-अमेरिका तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ रहा है। हॉर्मुज में समुद्री आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ी हुई है। कतर समेत कुछ देश दोनों पक्षों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिशों में शामिल हैं।

यमन में हूती गतिविधियां भी क्षेत्रीय तनाव को और जटिल बना रही हैं। इसके चलते समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। तेल बाजार भी ईरान-अमेरिका तनाव और हॉर्मुज में आवाजाही से जुड़े घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दे रहा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के बावजूद किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। हॉर्मुज में नौवहन बहाली, अमेरिकी सैन्य दबाव और नाकाबंदी, ईरानी संपत्तियों तथा युद्ध समाप्त करने की शर्तें आगे की बातचीत के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नजर बनी हुई है।

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