7 अक्टूबर को रेपो रेट पर बड़ा फैसला, बढ़ी तो लोन EMI से लेकर FD तक पड़ेगा असर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक जारी है। बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा 7 अक्टूबर को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे। इस बैठक में सबसे ज्यादा नजर रेपो रेट पर है। बाजार के जानकारों और अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक, RBI इस बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है।
अगर ऐसा होता है तो मौजूदा 5.25 प्रतिशत रेपो रेट बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगा। इसका असर खास तौर पर रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन की EMI पर पड़ सकता है। वहीं, बैंक FD की ब्याज दरों में भी बदलाव की संभावना रहेगी।
7 अक्टूबर को रेपो रेट पर फैसला
बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि RBI इस बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला MPC की बैठक में ही लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल इसे केवल बाजार का अनुमान माना जाना चाहिए।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के दौरान रेपो रेट 5.75 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वहीं, जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस प्वाइंट की दो बढ़ोतरी का अनुमान जताया है।
रेपो रेट बढ़ा तो EMI पर क्या होगा?
अगर आपका होम लोन या अन्य लोन रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा है, तो RBI की ओर से रेपो रेट बढ़ाए जाने का असर आपकी ब्याज दर और EMI पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका वास्तविक असर बैंक की नीति और आपके लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा। कुछ मामलों में बैंक EMI बढ़ा सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में EMI को समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
वहीं, फिक्स्ड रेट लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI पर रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ता।
FD कराने वालों को मिल सकता है फायदा
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। आम तौर पर जब ब्याज दरों का माहौल ऊपर जाता है तो बैंक नई FD पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। ऐसे में FD में पैसा रखने वाले ग्राहकों को फायदा मिल सकता है।
हालांकि, FD की ब्याज दरें केवल RBI के रेपो रेट पर निर्भर नहीं करतीं। बैंक की फंडिंग जरूरत, जमा की मांग और उसकी आंतरिक नीतियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है। इसमें बदलाव होने पर बैंकों के लिए फंड की लागत प्रभावित होती है। इसका असर आगे चलकर बैंक के लोन और जमा की ब्याज दरों पर दिखाई दे सकता है।
यही वजह है कि RBI की MPC बैठक का फैसला आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगे होने की संभावना रहती है, जबकि FD की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। वहीं, रेपो रेट में कटौती होने पर कर्ज सस्ता होने और FD की दरों में कमी आने की संभावना रहती है।
नोट: रेपो रेट को लेकर ऊपर दिए गए आंकड़े और अनुमान MPC के अंतिम फैसले से पहले बाजार में लगाए जा रहे अनुमानों पर आधारित हैं। 7 अक्टूबर को RBI की आधिकारिक घोषणा के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।



