छत्तीसगढ़ में 34 हजार जल निकाय दर्ज, 85 फीसदी से ज्यादा जल स्रोत उपयोग में; जानें पूरी रिपोर्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधनों को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की पहली जल निकाय गणना (First Census of Water Bodies) के अनुसार प्रदेश में कुल 34,000 जल निकाय दर्ज किए गए हैं। इनमें तालाब, जलाशय और अन्य प्राकृतिक एवं मानव निर्मित जल स्रोत शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 28,976 यानी 85.2 प्रतिशत जल निकाय उपयोग में हैं, जबकि 5,024 जल निकाय विभिन्न कारणों से उपयोग में नहीं हैं।

यह गणना देशभर में जल निकायों की स्थिति, उनके उपयोग, स्वामित्व और स्थान से जुड़ा एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 24,24,540 जल निकाय दर्ज किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के 98.6% जल निकाय ग्रामीण क्षेत्रों में

जल निकाय गणना के अनुसार छत्तीसगढ़ के कुल 34,000 जल निकायों में से 33,519 यानी करीब 98.6 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। वहीं 481 जल निकाय शहरी क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं। इससे पता चलता है कि प्रदेश के जल संसाधनों का बड़ा हिस्सा ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।

आधिकारिक राज्यवार रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 9,209 प्राकृतिक और 24,791 मानव निर्मित जल निकाय दर्ज किए गए हैं। प्राकृतिक जल निकायों में से 97.2 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जबकि मानव निर्मित जल निकायों में 99.1 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।

28,976 जल निकाय नियमित उपयोग में

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 34,000 जल निकायों में से 28,976 जल निकाय उपयोग में हैं। वहीं 5,024 जल निकाय सूखने, गाद भरने, क्षतिग्रस्त होने, लवणता या अन्य कारणों से उपयोग में नहीं हैं।

उपयोग में आने वाले जल निकायों का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक इन जल निकायों में मत्स्य पालन प्रमुख उपयोगों में से एक है। इसके अलावा घरेलू एवं पेयजल, सिंचाई, भूजल रिचार्ज और अन्य गतिविधियों के लिए भी जल निकायों का उपयोग किया जाता है।

आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या

राज्यवार रिपोर्ट में जल निकायों के स्थान के आधार पर भी आंकड़े दर्ज किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 13,647 यानी 40.1 प्रतिशत जल निकाय नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तथा 12,355 यानी 36.3 प्रतिशत जल निकाय जनजातीय क्षेत्रों में स्थित हैं।

इस तरह जल निकायों का बड़ा हिस्सा उन इलाकों में मौजूद है, जहां ग्रामीण एवं आदिवासी आबादी की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों पर काफी हद तक निर्भर करती है।

सार्वजनिक स्वामित्व वाले जल निकाय ज्यादा

रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के 34,000 जल निकायों में से 29,463 सार्वजनिक स्वामित्व में हैं, जबकि 4,537 जल निकाय निजी स्वामित्व में दर्ज किए गए हैं। यानी राज्य के करीब 86.7 प्रतिशत जल निकाय सार्वजनिक स्वामित्व वाले हैं। जल संरक्षण की योजना बनाने में मिलेगी मदद

जल निकायों का यह डेटाबेस राज्य में जल संरक्षण, पुनर्जीवन और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए उपयोगी आधार उपलब्ध करा सकता है। खासकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मौजूद जल स्रोतों की पहचान होने से उनके संरक्षण और पुनरुद्धार की योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।

रिपोर्ट में जल निकायों की स्थिति और उपयोग से जुड़े आंकड़े भी दर्ज किए गए हैं। ऐसे में भविष्य में जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान, जल संरक्षण संरचनाओं की योजना और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में इस तरह के आंकड़ों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

पर्यटन की संभावनाओं को भी मिल सकता है बढ़ावा

छत्तीसगढ़ अपने वन क्षेत्रों, पहाड़ियों, झरनों और जलप्रपातों के लिए जाना जाता है। जल संसाधनों की मैपिंग से प्राकृतिक जल स्रोतों से जुड़े क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण को बेहतर तरीके से योजनाबद्ध किया जा सकता है।

हालांकि, चित्रकोट, तीरथगढ़ या अन्य विशिष्ट पर्यटन स्थलों को इस 34,000 जल निकायों की गणना में अलग-अलग शामिल किए जाने का दावा आधिकारिक रिपोर्ट से स्वतः प्रमाणित नहीं होता। इसलिए ऐसे दावों को संबंधित विभाग के स्रोत या स्थल-विशिष्ट रिकॉर्ड से अलग से सत्यापित करना जरूरी होगा।

जल निकायों की स्थिति पर सामने आए अहम आंकड़े

  • कुल जल निकाय: 34,000

  • ग्रामीण क्षेत्र: 33,519

  • शहरी क्षेत्र: 481

  • उपयोग में जल निकाय: 28,976

  • उपयोग में नहीं: 5,024

  • प्राकृतिक जल निकाय: 9,209

  • मानव निर्मित जल निकाय: 24,791

  • सार्वजनिक स्वामित्व: 29,463

  • निजी स्वामित्व: 4,537

  • जनजातीय क्षेत्रों में: 12,355

  • नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में: 13,647

छत्तीसगढ़ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह डेटा?

जल निकायों की संख्या और उनकी स्थिति का आधिकारिक डेटाबेस तैयार होने से राज्य में जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन, पेयजल, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए आधारभूत जानकारी उपलब्ध होती है। साथ ही, जिन जल निकायों का उपयोग वर्तमान में नहीं हो रहा है, उनके संरक्षण और पुनर्जीवन की संभावनाओं पर भी योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा सकता है।

स्रोत: केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की पहली जल निकाय गणना एवं छत्तीसगढ़ राज्यवार रिपोर्ट।

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