क्विक कॉमर्स से सामान मंगाना होगा और पारदर्शी, FSSAI ला सकता है नए नियम; एक्सपायरी डेट से लेकर रिफंड तक की मिलेगी जानकारी FSSAI New Rules: क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए खाद्य सुरक्षा

नई दिल्ली। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी क्विक कॉमर्स सेवाओं से सामान मंगाने वाले ग्राहकों को आने वाले समय में उत्पादों से जुड़ी अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत खाद्य उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, सामग्री, रिफंड पॉलिसी और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा सकता है।
जी बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जल्द जारी होने की संभावना है। हालांकि, फिलहाल प्रस्तावित नियमों की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने और उनके लागू होने की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट की मिलेगी जानकारी
प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य ऑनलाइन खाद्य उत्पाद खरीदने वाले ग्राहकों को जरूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है। इसके तहत उत्पाद कब बनाया गया है, उसकी एक्सपायरी डेट क्या है और उसमें किन सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है, जैसी जानकारियां स्पष्ट रूप से दिखाने की व्यवस्था की जा सकती है।
इससे ग्राहकों को खरीदारी से पहले उत्पाद की गुणवत्ता और इस्तेमाल की अवधि से जुड़ी जानकारी जांचने में मदद मिलेगी। साथ ही, खराब या गलत सामान मिलने पर रिफंड लेने और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अधिक स्पष्ट हो सकती है।
रिफंड पॉलिसी और शिकायत प्रक्रिया पर भी जोर
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को कम समय में सामान पहुंचाने का दावा किया जाता है। ऐसे में उत्पाद से जुड़ी जानकारी और ग्राहक शिकायतों का समाधान महत्वपूर्ण हो जाता है।
प्रस्तावित बदलावों के तहत कंपनियों को रिफंड पॉलिसी, शिकायत दर्ज कराने के तरीके और शिकायतों के निपटारे से जुड़ी शर्तें स्पष्ट रूप से बतानी पड़ सकती हैं। इससे ग्राहकों को खराब, क्षतिग्रस्त या गलत उत्पाद मिलने की स्थिति में उपलब्ध विकल्पों को समझने में आसानी हो सकती है।
ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले उत्पादों पर चेतावनी लेबल का प्रस्ताव
FSSAI के प्रस्तावित बदलावों में खाद्य उत्पादों पर चेतावनी वाले लेबल लगाने का मुद्दा भी शामिल बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाले उत्पादों के लिए रेड हेक्सागन जैसे चेतावनी संकेतों पर विचार किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य ग्राहकों को उत्पाद की पोषण संबंधी विशेषताओं के बारे में खरीदारी के समय ही सचेत करना है। हालांकि, चेतावनी लेबल का अंतिम स्वरूप, किन उत्पादों पर इसे लागू किया जाएगा और इसके लिए क्या मानक होंगे, यह आधिकारिक नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
नए साल से लागू हो सकते हैं नियम
जी बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए नियम नए साल की शुरुआत से लागू किए जाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इसे अभी संभावित समयसीमा ही माना जाना चाहिए।
यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो क्विक कॉमर्स कंपनियों को अपने ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खाद्य उत्पादों की जानकारी प्रदर्शित करने के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ग्राहकों को उत्पादों के बारे में अधिक पारदर्शी जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पांच साल में सात गुना तक बढ़ सकता है क्विक कॉमर्स बाजार
भारत में क्विक कॉमर्स का कारोबार तेजी से विस्तार कर रहा है। खबर में उद्धृत गूगल और रेडसीयर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इस बाजार का आकार करीब 13 अरब डॉलर आंका गया था। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक यह बढ़कर 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
तेजी से बढ़ते इस बाजार में खाद्य उत्पादों की जानकारी, सुरक्षा मानकों और ग्राहकों की शिकायतों के समाधान को लेकर प्रस्तावित बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, इनकी अंतिम व्यवस्था और लागू होने की तारीख का पता आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही चलेगा।



