दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय सहायता शिविर का शुभारंभ, नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर जोर; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा— बस्तर को देश का अग्रणी विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाएंगे
रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब लक्ष्य बस्तर को भय और हिंसा से मुक्त कर खुशहाल, समृद्ध और विकसित क्षेत्र बनाना है।
केंद्रीय गृह मंत्री गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार नक्सली हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति और दिव्यांगजन के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर काम किया जा रहा है, ताकि प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिल सके।
तीन दिन में 768 दिव्यांगजनों को मिलेगा लाभ
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल हैं।
शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। लाभार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम पैर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर के दौरान जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें 1,570 से अधिक लाभार्थी बस्तर क्षेत्र के थे। यह आंकड़ा दशकों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे परिवारों की पीड़ा को दर्शाता है।
नक्सली हिंसा के पीड़ितों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता
अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने हाथ-पैर गंवाए और जीवनभर की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त करना जरूरी था, लेकिन इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा को दूर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को आसान बनाया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित लोग फिर से अपने पैरों पर खड़े हों, आत्मविश्वास के साथ जीवन जिएं और समाज की मुख्यधारा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व और स्थानीय समाज के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष तथा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम से बदल रही क्षेत्र की तस्वीर
अमित शाह ने बस्तर में शांति और विकास के लिए राज्य सरकार की पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलें क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां अब युवा खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं और जनजातीय समाज अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान दे रहा है।
बस्तर ओलंपिक युवाओं को खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दे रहा है, जबकि बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय लोककला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 नक्सलियों के पुनर्वास की जानकारी
केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास से संबंधित आंकड़े साझा करते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
उन्होंने कहा कि जिन 7,328 लोगों के बैंक खाते नहीं थे, उनके खाते खोले गए हैं। 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी दी गई है तथा 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है।
अमित शाह के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ सकें।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए हैं और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई है। संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के अंतर्गत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।
200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा बल तैनात रहकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, अब वहीं से सरकारी अधिकारी जनसेवा और विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशासनिक सुविधाओं, आजीविका और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
बस्तर को देश का अग्रणी विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाएंगे: मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के साहस, पराक्रम और बलिदान के साथ बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में बलिदान देने वाले जवानों और नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग लंबे समय से भय और हिंसा से मुक्ति चाहते थे। उनकी शांति, सुरक्षा और विकास की आकांक्षा ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। अब राज्य सरकार का संकल्प है कि इस क्षेत्र को तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ाकर देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाया जाए। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
500 से अधिक गांवों तक पहुंचीं सड़क और बिजली की सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के उन दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं, जो लंबे समय से बुनियादी सेवाओं से वंचित रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। घरों तक नल से जल पहुंचाने और दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार का काम भी तेजी से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है। राशन वितरण की समस्याओं को दूर करने के लिए गांवों में ही राशन दुकानों की व्यवस्था की जा रही है, जिससे ग्रामीणों को आवश्यक खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़े।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बस्तर के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और संचार जैसी सुविधाएं पहुंचें।
सुरक्षा शिविरों में शुरू होंगी कौशल और आजीविका गतिविधियां
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में स्थापित सुरक्षा शिविरों को सेवा और विकास केंद्रों में बदलने की पहल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इन केंद्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
सिंचाई परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ भूमि को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए कृषि, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी प्राथमिकता में है। ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है और डेयरी विकास की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सली हिंसा में अंग गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को सहायता उपलब्ध कराना सरकार की संवेदनशील जिम्मेदारी है। कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण मिलने से प्रभावित लोगों को दैनिक कार्य करने, आवागमन और आत्मनिर्भर जीवन जीने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा के शिविर में तीन जिलों के 768 दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल उपकरण देना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के जीवन में आत्मविश्वास लौटाना और उन्हें सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और अन्य सहयोगी संस्थाओं के योगदान की सराहना की। उन्होंने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दंतेश्वरी से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
दिव्यांग पुलिस जवान ने सुनाई आपबीती, कृत्रिम पैर मिलने से फिर चलने लगे
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने दिव्यांग लाभार्थियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए तैयार हैं।
बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने गोंडी बोली में अपनी आपबीती साझा की।



