रायपुर में मुफ्त पानी-बिजली पर नगर निगम का शिकंजा! मंदिरों से निजी कॉलोनियों तक होगी जांच

Raipur Nagar Nigam: रायपुर नगर निगम शहर के सामाजिक भवनों, सामुदायिक परिसरों और मंदिरों में पानी की सप्लाई के लिए लगाए गए मोटर पंपों की मुफ्त बिजली सुविधा बंद करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए निगम के जल कार्य विभाग ने सभी जोनों में सर्वे शुरू करा दिया है। सर्वे के दौरान ऐसे परिसरों की पहचान की जा रही है, जहां निगम के मोटर पंपों से पानी की सप्लाई होती है और बिजली का खर्च नगर निगम उठाता है। सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित संस्थाओं को बिजली और पानी की व्यवस्था का खर्च खुद उठाना पड़ सकता है।

जोनवार सर्वे, मोटर पंपों की तैयार होगी सूची

नगर निगम के जल कार्य विभाग ने सभी जोनों के इंजीनियरों को सामाजिक भवनों, सामुदायिक परिसरों, मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत यह जानकारी जुटाई जा रही है कि किन परिसरों में निगम के मोटर पंप लगे हैं और उनके संचालन पर कितना बिजली खर्च हो रहा है।

फिलहाल ऐसे कई स्थानों पर मोटर पंपों के बिजली बिल का भुगतान नगर निगम करता है। अब इस खर्च को कम करने के लिए पंपों की सूची तैयार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के बाद संबंधित संस्थाओं को बिजली खर्च की जिम्मेदारी उठानी होगी। ऐसा नहीं करने पर मोटर पंपों के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है।

निजी कॉलोनियों की पेयजल व्यवस्था की भी होगी जांच

नगर निगम बिल्डरों द्वारा विकसित निजी आवासीय कॉलोनियों में पेयजल व्यवस्था का भी सर्वे करा रहा है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि किन कॉलोनियों में पानी की व्यवस्था बिल्डरों को स्वयं करनी थी और कहां के रहवासी नगर निगम से जलापूर्ति की मांग कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, कुछ कॉलोनियों के लेआउट में बिल्डरों की ओर से पेयजल व्यवस्था करने का प्रावधान रखा गया था। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों से वहां के रहवासी नगर निगम से पानी की सप्लाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे सभी स्थानों की जानकारी जुटाकर सूची तैयार की जा रही है।

मुक्तिधामों के मोटर पंपों पर अभी फैसला नहीं

नगर निगम शहर के कई मुक्तिधामों में बोरवेल या पाइपलाइन के जरिए पानी उपलब्ध कराता है। हालांकि, इन स्थानों पर लगे मोटर पंपों की बिजली सप्लाई बंद की जाएगी या मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी, इस पर फिलहाल निर्णय नहीं लिया गया है।

जल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मुक्तिधामों को लेकर अलग से निर्णय लिया जा सकता है। इसलिए फिलहाल इन परिसरों में पानी और बिजली की सुविधा बंद करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

तालाबों में पानी भरने वाले बोरवेल भी सर्वे के दायरे में

नगर निगम डगनिया और रामनगर तालाब में पानी भरने के लिए इस्तेमाल होने वाले बोरवेल और मोटर पंपों की भी जांच कर रहा है। इन पंपों के जरिए तालाबों में पानी भरा जाता है और इनके संचालन पर बिजली खर्च होता है।

अधिकारियों के मुताबिक, इन मोटर पंपों के बिजली कनेक्शन बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जल बोर्ड से रिपोर्ट भी मांगी गई है।

शहर में 2200 से ज्यादा मोटर पंपों से जलापूर्ति

नगर निगम शहर में 2200 से अधिक मोटर पंपों के माध्यम से जलापूर्ति करता है। इनमें विभिन्न सार्वजनिक परिसरों में लगे पंप भी शामिल हैं। इन पंपों के संचालन पर होने वाले बिजली खर्च का भार निगम को उठाना पड़ता है।

अब सर्वे के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि किन स्थानों पर निगम के मोटर पंपों का इस्तेमाल हो रहा है और उनके बिजली बिल का भुगतान कौन कर रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित संस्थाओं को खर्च की जिम्मेदारी सौंपने और जरूरत के मुताबिक बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है।

जल विभाग के कार्यपालन अभियंता ने क्या कहा?

जल विभाग के कार्यपालन अभियंता नरसिंह फरेन्द्र के अनुसार, सभी जोनों में ऐसे परिसरों का सर्वे कराया जा रहा है, जहां लगे मोटर पंपों का बिजली बिल नगर निगम भरता है। इस खर्च को कम करने के लिए बिजली कनेक्शन बंद करने की कार्रवाई की तैयारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मुक्तिधामों में लगे मोटर पंपों के संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

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