महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में बढ़ी पहल, अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़-ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक

रायपुर | छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान की दिशा में गुरुवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
महानदी दोनों राज्यों को जोड़ने वाली जीवनधारा : साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं है, बल्कि दोनों राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, कृषि और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा को बांटने वाली नहीं, बल्कि दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी है। ऐसे में इसका समाधान टकराव या प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग, विश्वास और सहमति की भावना से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें दोनों राज्यों और उनके नागरिकों के हित सुरक्षित रहें। छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान का पक्षधर है। इसमें दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ की जरूरतों के साथ ओडिशा के हितों का भी सम्मान
सीएम साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और इसके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रदेश में स्थित है। राज्य में कृषि, सिंचाई, पेयजल और विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की विकास आवश्यकताएं महानदी से जुड़ी हैं। इसलिए स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की वास्तविक जरूरतों का समुचित ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की आवश्यकताओं और हितों का भी पूरा सम्मान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ इसके महत्व को भलीभांति समझता है। उन्होंने हीराकुंड जलाशय के हितों और उसके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने की बात कही।
जल संसाधन को साझा समृद्धि का माध्यम बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को साझा समृद्धि का माध्यम बनाया जाना चाहिए। दोनों राज्यों के बीच ऐसा तंत्र विकसित करने की जरूरत है, जिसमें जल की उपलब्धता, आवश्यकता और उपयोग से संबंधित तथ्य पारदर्शी तरीके से साझा किए जाएं तथा वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिए जाएं।
उन्होंने कहा कि जल उपलब्धता, वर्तमान और भविष्य की जरूरतों, सिंचाई, पेयजल, पर्यावरणीय आवश्यकताओं तथा दोनों राज्यों की विकास संबंधी जरूरतों का समग्र अध्ययन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
अमित शाह की पहल से समाधान की उम्मीद मजबूत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महानदी जल विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद से आपसी सहमति का रास्ता निकलने की उम्मीद मजबूत हुई है।
उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। इसी तरह राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित विषयों को संवाद और सहमति के माध्यम से सुलझाने के प्रयास सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से जटिल विषयों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का वातावरण बना है।
वैज्ञानिक तथ्यों और संवाद से निकलेगा टिकाऊ समाधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी से जुड़े विषय में भावनाओं के साथ-साथ वैज्ञानिक तथ्यों का भी समान महत्व है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता और केंद्रीय जल आयोग के निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं पारदर्शी तकनीकी आकलन पर भरोसा जताया।
उन्होंने कहा कि तकनीकी स्तर पर तथ्य स्पष्ट होने और राजनीतिक स्तर पर संवाद एवं विश्वास कायम रहने से ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जो दोनों राज्यों के लिए स्वीकार्य हो और आने वाली पीढ़ियों के हित में भी हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के परामर्श और केंद्र सरकार की मध्यस्थता से जो न्यायसंगत एवं व्यावहारिक समाधान सामने आएगा, छत्तीसगढ़ उसे सकारात्मक भावना के साथ आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगा।
बस्तर मॉडल की तरह समन्वय से समाधान की उम्मीद
सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय के सकारात्मक परिणामों को बस्तर में करीब से देखा है। नक्सलवाद जैसी लंबे समय से चली आ रही चुनौती से निपटने के लिए सुरक्षा, विकास और जनविश्वास को साथ लेकर किए गए समन्वित प्रयासों से बस्तर में व्यापक बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि जटिल और लंबे समय से लंबित विषयों में स्पष्ट इच्छाशक्ति, निरंतर संवाद और सभी पक्षों के बीच विश्वास हो तो समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति संभव है। महानदी के विषय पर भी दोनों राज्य इसी सकारात्मक भावना के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
‘महानदी विवाद नहीं, सहयोग की धारा बने’
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी राज्यों के लोगों के बीच आत्मीय संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों प्रदेशों की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली में अनेक समानताएं हैं।
उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ की आस्था और शिवरीनारायण से पुरी तक जुड़े सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों राज्यों की आस्था और संस्कृति उन्हें जोड़ती है। महानदी भी इसी साझा विरासत और जीवन का हिस्सा है। इसलिए महानदी को विवाद की रेखा नहीं, बल्कि सहयोग, विकास और विश्वास की धारा बनाना सामूहिक प्रयास होना चाहिए।
2018 में हुआ था महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन
महानदी जल बंटवारे से जुड़े विवाद के समाधान के लिए वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। इसके समानांतर दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक संवाद और तकनीकी विमर्श भी जारी रहा है। तकनीकी विषयों के समाधान में केंद्रीय जल आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक को इसी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में सभी पक्षों ने संवाद और तकनीकी विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने तथा महानदी से जुड़े मुद्दों का पारस्परिक सहमति से स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में सकारात्मक चर्चा की।
बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
यदि चाहें तो मैं इसी खबर के लिए SEO हेडलाइन, 150-160 कैरेक्टर का मेटा डिस्क्रिप्शन, URL स्लग और 5 प्रमुख कीवर्ड भी तैयार कर सकता हूं।



