उर्दू के दिग्गज शायर बशीर बद्र का निधन, चाहने वालों की आंखें नम


उर्दू शायरी की दुनिया का एक चमकता सितारा अब हमेशा के लिए खामोश हो गया। मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन की खबर से साहित्य और शायरी जगत में गहरा शोक है। उनके इंतकाल के बाद देशभर के अदबी हलकों, शायरों और साहित्य प्रेमियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।
रिश्तों, मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी के बदलते एहसासों को बेहद खूबसूरती से अल्फाज देने वाले बशीर बद्र की गजलें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
“कोई हाथ भी न मिलाएगा…” और “उजाले अपनी यादों के…” जैसे उनके मशहूर अशआर पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ से भी जुड़ी थीं यादें
छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों और कवियों ने बशीर बद्र से जुड़ी अपनी यादें साझा करते हुए उन्हें बेहद सरल और विनम्र इंसान बताया। महासमुंद के कवि अशोक शर्मा ने बताया कि वर्ष 1988 में जब बशीर बद्र रायपुर आए थे, तब उन्हें महासमुंद ले जाने का अवसर मिला था।
अशोक शर्मा के मुताबिक, स्थानीय साहित्यिक गोष्ठियों में बशीर बद्र ने न सिर्फ शिरकत की, बल्कि युवा और स्थानीय रचनाकारों की खुलकर सराहना भी की। उन्होंने बताया कि इतने बड़े शायर होने के बावजूद बशीर बद्र में जरा भी अहंकार नहीं था।
उन्होंने एक भावुक स्मृति साझा करते हुए कहा कि बाद में भोपाल में हुई मुलाकात के दौरान बशीर बद्र ने अपने हाथों से शरबत पिलाया और लंबे समय तक साहित्य और शायरी पर चर्चा की। अशोक शर्मा के अनुसार, उनके एक शेर को सुनकर बशीर बद्र ने मुस्कुराते हुए कहा था— “इसे संभाल कर रखना।”
शायरी के जरिए हमेशा जिंदा रहेंगे बशीर बद्र
बशीर बद्र का जाना उर्दू अदब की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी गजलें और शेर आने वाली पीढ़ियों को मोहब्बत, संवेदना और इंसानी रिश्तों की गहराई का एहसास कराते रहेंगे।



