AIIMS Raipur: बेड नहीं मिलने पर मरीज रेफर, NIRF रिपोर्ट में भी कमजोर दिखा संस्थान का परसेप्शन


All India Institute of Medical Sciences Raipur में एक गंभीर मरीज को आईसीयू बेड नहीं मिलने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक मरीज का इलाज पहले एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उसे एम्स रायपुर लाया गया, लेकिन वहां सभी आईसीयू बेड भरे होने की बात कहकर मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी और तत्काल आईसीयू सुविधा की जरूरत थी। एम्स प्रबंधन के अनुसार उस समय संस्थान में कोई बेड उपलब्ध नहीं था, जिसके बाद मरीज को एंबुलेंस के जरिए Dr. Bhim Rao Ambedkar Memorial Hospital भेजा गया। एंबुलेंस में डॉक्टर और जरूरी मेडिकल स्टाफ भी मौजूद थे। हालांकि मरीज की मौत हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
NIRF रिपोर्ट में भी कमजोर दिखी छवि
इधर, द नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी National Institutional Ranking Framework (NIRF) की पिछली रिपोर्ट में भी एम्स रायपुर का परसेप्शन स्कोर बेहद कमजोर सामने आया था। संस्थान को 100 में केवल 20.62 अंक मिले थे, जिसे लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों को बार-बार रेफर किए जाने और सीमित सुविधाओं की धारणा के कारण संस्थान की सार्वजनिक छवि प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट में रिसर्च और पब्लिकेशन के मामले में भी एम्स रायपुर का प्रदर्शन कमजोर बताया गया। इस श्रेणी में संस्थान को 40 में क्रमशः 10.62 और 12 अंक मिले थे।
हालांकि कुल रैंकिंग में एम्स रायपुर ने सुधार करते हुए 38वें स्थान से छलांग लगाकर 31वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन परसेप्शन और रिसर्च जैसे महत्वपूर्ण पैमानों पर कमजोर प्रदर्शन ने संस्थान की ब्रांड वैल्यू और पहचान पर असर डाला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान से मरीजों और लोगों की अपेक्षाएं काफी अधिक होती हैं। ऐसे में बेड की कमी, रेफरल की स्थिति और सीमित रिसर्च आउटपुट जैसी चुनौतियां संस्थान की छवि को प्रभावित कर सकती हैं।



