गांजा तस्करी करने वाले दो आरोपियों को 20 साल की कैद, उरला पुलिस की 4 साल पुरानी कार्रवाई में कोर्ट का फैसला

काजू के छिलकों के नीचे छिपाकर ले जाया जा रहा था 8.80 क्विंटल गांजा, ओडिशा से महाराष्ट्र की थी सप्लाई

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों की तस्करी के एक बड़े मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। उरला थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में पकड़े गए गांजा तस्करी के मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने 20-20 साल की कठोर कैद और 2-2 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोनों को 6-6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश शैलेश कुमार शर्मा की अदालत में हुई, जहां अभियोजन पक्ष ने कुल 12 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। जांच अधिकारी टीआई भरत बरेठ द्वारा पूरी जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया था।

काजू के छिलकों के नीचे छिपा था गांजा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपियों रंजन कुमार साहू (44 वर्ष) और मिट्ठू पदयाली (32 वर्ष), निवासी गंजाम (ओडिशा), एक ट्रक में अवैध रूप से गांजा भरकर महाराष्ट्र ले जा रहे थे। तस्करी को छिपाने के लिए गांजे को काजू के छिलकों के नीचे रखा गया था। पुलिस ने ट्रक से कुल 8.80 क्विंटल गांजा बरामद किया।

15 मई 2022 को हुई थी कार्रवाई
विशेष लोक अभियोजक स्वाति शर्मा ने बताया कि 15 मई 2022 को उरला पुलिस को सूचना मिली थी कि ओडिशा से ट्रक क्रमांक OD04 H 0865 में गांजा ले जाया जा रहा है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उरला थाना प्रभारी निरीक्षक भरत बरेठ ने अपनी टीम के साथ कन्हेरा स्थित सांई निर्मल कंपनी के सामने घेराबंदी कर ट्रक को पकड़ लिया।

NDPS एक्ट के तहत सख्त सजा
यह कार्रवाई नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत की गई थी, जिसमें भारी मात्रा में मादक पदार्थों की तस्करी पर कठोर सजा का प्रावधान है।

इस फैसले को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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