Quad Summit: हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच क्वाड देशों का बड़ा फैसला, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग होगा मजबूत


नई दिल्ली: चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद यानी क्वाड (Quad) के सदस्य देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को क्वाड देशों ने समुद्री निगरानी, बंदरगाह अवसंरचना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई नए उपायों की घोषणा की। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इन देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
समुद्री सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक में सदस्य देशों ने समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने, बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। माना जा रहा है कि दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
क्वाड देशों ने कहा कि क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी देश द्वारा दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
बैठक के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में उपयोग होने वाले खनिजों को लेकर सदस्य देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में साझेदारी को भी आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक सक्रियता के कारण क्वाड देशों के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। हाल के वर्षों में समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर क्वाड की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।
भारत के लिए क्यों अहम है क्वाड?
भारत के लिए क्वाड रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी और समुद्री गतिविधियों के बीच क्वाड भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्वाड के जरिए भारत को तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में भी बड़ा फायदा मिल सकता है।



