अक्ती (अक्षय तृतीया) पर बिना मुहूर्त के होते हैं शुभ कार्य, छत्तीसगढ़ में नए साल की शुरुआत का प्रतीक


रायपुर, 20 अप्रैल 2026 | छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति में ‘अक्ती’ यानी अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इसे प्रदेश का पहला और सबसे बड़ा तिहार (त्योहार) माना जाता है, जो नई शुरुआत, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है।
अक्ती को “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग या ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना या अन्य मांगलिक कार्य इस दिन बिना मुहूर्त के किए जा सकते हैं।
किसानों के लिए खास महत्व
यह पर्व खासतौर पर किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अक्ती के दिन किसान खेती-किसानी के नए सत्र की शुरुआत करते हैं। इस अवसर पर हल (नांगर), बैलों और खेती के औजारों की पूजा की जाती है तथा अच्छी फसल की कामना की जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन खेतों में जाकर प्रतीकात्मक रूप से जुताई की शुरुआत की जाती है, जो आने वाले कृषि वर्ष के शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।
नई शुरुआत और समृद्धि का पर्व
अक्ती को अक्षय फल देने वाला दिन माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ है कभी न समाप्त होने वाला, इसलिए इस दिन किए गए कार्यों को दीर्घकालिक सफलता और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
छत्तीसगढ़ में यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी लोगों को जोड़ने का अवसर प्रदान करता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
अक्ती का यह पर्व प्रदेश की परंपरा, कृषि संस्कृति और लोक जीवन की गहराई को दर्शाता है, जो हर साल नई उम्मीदों और खुशहाली का संदेश लेकर आता है।



