India-US Nuclear Partnership: मार्को रूबियो की भारत यात्रा से परमाणु ऊर्जा सहयोग को मिल सकती है नई रफ्तार


नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग को जल्द नई गति मिल सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की 23 से 26 मई तक प्रस्तावित भारत यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रणनीतिक तकनीक और रक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।
भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर सेक्टर में सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार अमेरिका
भारत दौरे पर रवाना होने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत को अमेरिका का “महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार” बताते हुए ऊर्जा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
रणनीतिक तकनीक और रक्षा सहयोग पर भी होगी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा, एडवांस टेक्नोलॉजी, रक्षा साझेदारी और व्यापार विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर फोकस कर रहा है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका के साथ सहयोग भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्य के लिए अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी राजदूत ने भी दिए संकेत
भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग में आगे बड़े कदम उठाए जाने के संकेत दिए हैं।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, निवेश और ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते हो सकते हैं।



