लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर लोकसभा में गरमाई बहस, गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर विपक्ष का हंगामा

नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। चर्चा की शुरुआत से पहले ही विपक्ष ने गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर जोरदार हंगामा किया। हालांकि, शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विधेयक पर चर्चा शुरू कराई।
‘युवाओं के भविष्य से जुड़ा है यह विधेयक’ : ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह संशोधन विधेयक देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून है। उन्होंने सभी सांसदों से सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की।
जितेंद्र सिंह बोले- छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है सरकार
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में लागू किया गया कानून स्वतंत्र भारत में अपनी तरह का पहला कानून था, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाना था। यह संशोधन सरकार की छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट संकल्प है कि “भारत माता के बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।” उन्होंने इसे भारतीय संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कानून बताया।
कांग्रेस ने उठाए पेपर लीक और एनटीए पर सवाल
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि 2024 का कानून इतना प्रभावी था, तो उसके बाद भी पेपर लीक की घटनाएं कैसे हुईं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पेपर लीक मामलों के कई आरोपियों को जमानत कैसे मिल गई।
गोगोई ने सरकार से मांग की कि पेपर लीक में शामिल अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े मामलों का भी उल्लेख करते हुए सरकार से कथित तौर पर बर्खास्त किए गए 474 लोगों के बारे में जवाब मांगा।
एनटीए को लेकर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि एनटीए में नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता नहीं है और पेपर लीक मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि छात्रों की पीड़ा और उनके भविष्य से जुड़े सवालों का सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
‘सरकार के लिए शिक्षा सिर्फ वोट का माध्यम’
अपने संबोधन के अंत में गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार के लिए शिक्षा केवल वोट की राजनीति का विषय बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है और अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा तथा लाठीचार्ज जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा।
फिलहाल, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर लोकसभा में चर्चा जारी है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलें सदन के समक्ष रख रहे हैं।



