छत्तीसगढ़ में गहराया पेट्रोल-डीजल संकट: CM साय ने घटाया कारकेड, कई जिलों में सप्लाई ठप, पंपों पर लंबी कतारें


रायपुर। छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल का संकट लगातार गहराता जा रहा है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में पिछले तीन-चार दिनों से ईंधन की सप्लाई चेन प्रभावित है, जिससे आम लोगों के साथ ट्रांसपोर्ट, कृषि और व्यवसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई जिलों में पेट्रोल पंप सूख चुके हैं और जहां थोड़ा बहुत स्टॉक बचा है, वहां सुबह से लंबी कतारें लग रही हैं।
इसी बीच मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने ईंधन संरक्षण को लेकर अपने कारकेड में कटौती करने का फैसला लिया है। उन्होंने मंत्रियों और आम जनता से भी पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने की अपील की है।
300 से अधिक पेट्रोल पंप खाली
जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 300 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म हो चुका है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा संभाग के कई इलाकों में फ्यूल इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं। कई पंपों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में “नो स्टॉक” के बोर्ड लगाए गए हैं।
रायपुर शहर में बढ़ती मांग के कारण सप्लाई और डिमांड का संतुलन बिगड़ गया है। ट्रांसपोर्टर्स, टैक्सी चालक और बस ऑपरेटर भी संकट से जूझ रहे हैं।
बलौदाबाजार से बस्तर तक असर
बलौदाबाजार जिले के संडी क्षेत्र सहित कई ग्रामीण इलाकों में किसान सुबह 4 बजे से ही डीजल के लिए लाइन में लग रहे हैं। कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि ट्रैक्टर और अन्य मशीनों के लिए पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है।
बस्तर और सरगुजा संभाग में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित सप्लाई के चलते लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर ईंधन लेना पड़ रहा है।
रोजाना 200 टैंकर की जरूरत, मांग पहुंची 250 तक
छत्तीसगढ़ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार सामान्य दिनों में प्रदेश में रोजाना करीब 200 टैंकर पेट्रोल-डीजल की खपत होती है। लेकिन सप्लाई प्रभावित होने और किल्लत की आशंका के चलते अचानक मांग बढ़कर 250 टैंकर तक पहुंच गई है।
एसोसिएशन का कहना है कि लोगों द्वारा जरूरत से ज्यादा ईंधन संग्रह करने से भी स्थिति बिगड़ रही है।
जमाखोरी रोकने प्रशासन सख्त
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने पेट्रोलियम पदार्थों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर सख्ती शुरू कर दी है। कई जिलों में डीजल बिक्री की सीमा प्रति वाहन 300 से 400 लीटर तय की गई है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि संदिग्ध पेट्रोल पंपों की एक महीने की सीसीटीवी फुटेज जांची जा सकती है। जमाखोरी या अवैध बिक्री पाए जाने पर संबंधित डीलर के खिलाफ एफआईआर और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
क्या बोले पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अखिल धगट ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पेट्रोलियम पदार्थों की मांग में अचानक बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने आम लोगों और व्यवसायिक संस्थानों से अपील की कि वे केवल जरूरत के मुताबिक ही पेट्रोल-डीजल खरीदें और अनावश्यक भंडारण से बचें, ताकि व्यवस्था सामान्य बनी रहे।



