ईरान के साथ सीजफायर पर ट्रंप का यू-टर्न? रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति मार्च 2026 से ही ईरान के साथ युद्धविराम (सीजफायर) के इच्छुक थे, जबकि सार्वजनिक तौर पर वे लगातार कड़े और आक्रामक बयान दे रहे थे।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 21 मार्च के आसपास ट्रंप प्रशासन पर्दे के पीछे ईरान के साथ तनाव कम करने और संभावित सीजफायर की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा था। उस समय ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाने की धमकी भी दी थी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, कड़ी बयानबाजी के बावजूद अमेरिका का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुचारु रूप से चालू रखना था। यही कारण था कि बैकचैनल के जरिए बातचीत के प्रयास जारी थे।

हालांकि मार्च में दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद अप्रैल में दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बन गई। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि सार्वजनिक बयान और कूटनीतिक प्रयासों के बीच अक्सर बड़ा अंतर होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ‘डुअल स्ट्रैटेजी’—जहां एक ओर दबाव बनाया जाता है और दूसरी ओर बातचीत जारी रहती है—अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में आम बात है।

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