सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति/जनजाति का दर्जा और SC/ST एक्ट का लाभ नहीं मिलेगा

नयी दिल्ली, 24 मार्च – भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि अगर कोई व्यक्ति धर्मांतरण करता है, तो उसे अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा और संबंधित सरकारी लाभ (SC/ST एक्ट के तहत) नहीं मिलेगा। यह निर्णय उन मामलों के संदर्भ में आया है, जहां अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन किया था और फिर SC/ST लाभ की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति या जनजाति के लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेंगे, जो अपने मूल धर्म पर कायम रहते हैं। कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति का सामाजिक और जाति संबंधी दर्जा भी बदल जाता है, और ऐसे मामलों में SC/ST एक्ट का लाभ नहीं दिया जा सकता।

यह निर्णय उन मामलों पर आधारित था, जिनमें धर्मांतरण के बाद व्यक्ति ने अपनी जाति के आधार पर सरकारी योजनाओं और नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने का प्रयास किया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन साबित होगा, जो धर्म परिवर्तन के बाद अपने SC/ST दर्जे और आरक्षण का लाभ प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।

इस फैसले के बाद, धर्मांतरण से संबंधित कानूनी और सामाजिक विवादों पर नया दृष्टिकोण सामने आएगा, और सरकारों और संबंधित अधिकारियों को नई दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करना होगा।

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