कागजी कंपनियों के जरिए 61 हजार करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी का खुलासा, 22 हजार से ज्यादा शेल कंपनियां बेनकाब

 देशभर में टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए संचालित किए जा रहे शेल कंपनियों के विशाल नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पिछले छह वर्षों में 22 हजार से अधिक शेल कंपनियां जांच एजेंसियों के रडार पर आई हैं। इनसे जुड़े मामलों में 61 हजार करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, बिना वास्तविक कारोबार, कार्यालय या कर्मचारियों के केवल कागजों पर संचालित इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले और अवैध धन को वैध बनाने के लिए किया जा रहा था।

2024-25 में 25 हजार से अधिक फर्जी कंपनियों का भंडाफोड़

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान देशभर में 25,009 फर्जी कंपनियों का पर्दाफाश किया गया। इन कंपनियों से जुड़े मामलों में लगभग 61,545 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी उजागर हुई। जांच में सामने आया कि ये कंपनियां मुख्य रूप से लोहा, स्क्रैप, कोयला और शराब कारोबार जैसे क्षेत्रों में सक्रिय थीं और फर्जी लेनदेन के माध्यम से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रही थीं।

छत्तीसगढ़ में भी 170 से अधिक ऐसी कंपनियों का पता चला, जिनके जरिए करीब 100 करोड़ रुपये के टैक्स गबन का मामला सामने आया है। वर्ष 2026 में भी आयकर विभाग, केंद्रीय एवं राज्य जीएसटी विभाग तथा जीएसटी इंटेलिजेंस इकाइयां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अब तक 25 से अधिक बड़ी कार्रवाईयों को अंजाम दिया जा चुका है।

बड़े घोटालों में सामने आया शेल कंपनियों का नेटवर्क

सीजीएमएससी घोटाला

जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान शशांक चोपड़ा और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर छापेमारी में 85 फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ। आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से 28.46 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले को अंजाम दिया गया।

2800 करोड़ रुपये का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में 200 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल कर कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। जांच में फर्जी होलोग्राम, लेबलिंग और सिंडिकेट नेटवर्क के जरिए अवैध कमाई को वैध दिखाने की साजिश सामने आई। इस मामले में 85 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

महादेव सट्टा एप मामला

भिलाई से संचालित बताए जाने वाले करीब 20 हजार करोड़ रुपये के महादेव सट्टा एप नेटवर्क की जांच में भी शेल कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई। जांच एजेंसियों के अनुसार, एजेंटों, बेनामी बैंक खातों और हवाला चैनलों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। मामले की जांच पुलिस, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई।

क्या होती है शेल कंपनी?

शेल कंपनी एक कानूनी रूप से पंजीकृत संस्था होती है, लेकिन उसका वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं होता। आमतौर पर ऐसी कंपनियों का कोई सक्रिय कार्यालय, कर्मचारी या वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं होती। कई मामलों में इन्हें डमी निदेशकों या बेनामी व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत किया जाता है ताकि वास्तविक संचालकों की पहचान छिपी रह सके।

कैसे काम करता है शेल कंपनियों का नेटवर्क?

विशेषज्ञों के अनुसार, शेल कंपनियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है। इनके जरिए बिना माल की वास्तविक आपूर्ति के फर्जी बिल जारी किए जाते हैं और इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया जाता है। इसके अलावा अवैध स्रोतों से प्राप्त धन को विभिन्न खातों में घुमाकर वैध व्यापारिक आय के रूप में दर्शाया जाता है।

कई मामलों में बड़ी कारोबारी संस्थाओं द्वारा भी संपत्तियों और देनदारियों को छिपाने, विलय या नए प्रोजेक्ट्स की आड़ में ऐसी कंपनियों का उपयोग किए जाने के आरोप सामने आते रहे हैं।

एजेंसियों की बढ़ी निगरानी

कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते मामलों को देखते हुए आयकर विभाग, जीएसटी विभाग, जीएसटी इंटेलिजेंस और प्रवर्तन एजेंसियों ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग, डेटा एनालिटिक्स और बैंकिंग लेनदेन की निगरानी के जरिए आने वाले समय में ऐसे और नेटवर्कों का खुलासा हो सकता है।

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