स्ट्रीट लाइट रखरखाव के टेंडर नियम सख्त, देरी पर रोजाना जुर्माना, घटिया सामग्री होगी रिजेक्ट

भिलाई। शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और टिकाऊ बनाने के लिए नगर निगम भिलाई ने स्ट्रीट लाइट संधारण एवं रखरखाव के टेंडर नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब घटिया या नकली सामग्री का उपयोग करने पर उसे तत्काल रिजेक्ट किया जाएगा, जबकि तय समय सीमा में मरम्मत नहीं करने पर ठेकेदार पर प्रतिदिन जुर्माना लगाया जाएगा।
नगर निगम का कहना है कि नई शर्तों से स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में सुधार होगा और टेंडर अवधि समाप्त होने के बाद भी शहर की सड़कें लंबे समय तक रोशन रहेंगी।
हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी आती थीं शिकायतें
नगर निगम भिलाई क्षेत्र में करीब 40 हजार बिजली पोलों पर स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, जिनके रखरखाव पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद ठेका अवधि समाप्त होते ही शहर के कई हिस्सों से स्ट्रीट लाइट बंद होने की शिकायतें बढ़ने लगती थीं। वहीं, ठेका अवधि बढ़ने पर शिकायतों में कमी देखने को मिलती थी।
इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए निगम ने इस बार निविदा की शर्तों को और अधिक सख्त एवं जवाबदेह बनाया है।
मरम्मत के बाद वारंटी और रिकॉर्ड रखना होगा अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत खराब एलईडी और अन्य फिटिंग को सेंट्रल स्टोर कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा। संबंधित जोन में शिकायत मिलने पर ठेकेदार को मौके पर पहुंचकर एलईडी, वायरिंग और अन्य फिटिंग की मरम्मत या आवश्यकता पड़ने पर उसका प्रतिस्थापन करना होगा।
मरम्मत के बाद संबंधित कार्य का रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज करना और वारंटी देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा श्रम, स्पेयर पार्ट्स, टूल्स, परिवहन और वारंटी की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। इन मदों के लिए अलग से कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
बिना अनुमति बाहर नहीं ले जा सकेंगे खराब उपकरण
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रभारी इंजीनियर की अनुमति के बिना कोई भी खराब फिटिंग या सामग्री जोन रिपेयर पॉइंट से बाहर नहीं ले जाई जा सकेगी। प्रत्येक खराब फिटिंग का रिकॉर्ड चालान के माध्यम से रखा जाएगा।
मरम्मत के बाद फिटिंग की जांच और अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के बाद ही भुगतान किया जाएगा तथा उसी फिटिंग का दोबारा उपयोग स्ट्रीट लाइट में किया जाएगा।
टेक्नीशियन और स्पेयर स्टॉक रखना होगा अनिवार्य
नई शर्तों के अनुसार ठेकेदार को नगर निगम के लिए एक टेक्नीशियन, एक हेल्पर और एक अधिकृत प्रतिनिधि उपलब्ध कराना होगा, जो कार्य अवधि के दौरान स्टोर, मुख्य कार्यालय और जोन कार्यालयों में मौजूद रहेंगे।
इसके अलावा प्रत्येक जोन कार्यालय में आठ कर्मचारी तथा मुख्य कार्यालय के लिए दो कर्मचारियों की तैनाती अनिवार्य होगी।
ठेकेदार को सेंट्रल स्टोर (एमसीबी) में आवश्यक स्पेयर स्टॉक और उपकरण भी उपलब्ध रखने होंगे। इनमें क्लैंप मीटर, मल्टीमीटर, एलईडी ड्राइवर, सोल्डरिंग आयरन, टेस्टिंग बोर्ड, स्क्रू-ड्राइवर सेट, प्लायर, कटर और अन्य सुरक्षा उपकरण शामिल हैं।
आयुक्त ने क्या कहा?
नगर निगम भिलाई की आयुक्त सुरुचि सिंह ने कहा कि स्ट्रीट लाइट मरम्मत और रखरखाव की निविदा में व्यापक बदलाव किए गए हैं, ताकि शहर में रात के समय राहगीरों को अंधेरे और खराब प्रकाश व्यवस्था जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
टेंडर की प्रमुख शर्तें
- मरम्मत के बाद वारंटी और रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज करना अनिवार्य।
- घटिया या नकली स्पेयर पार्ट्स मिलने पर सामग्री तत्काल रिजेक्ट होगी।
- रैंडम जांच में गुणवत्ता खराब मिलने पर जुर्माना या ठेका समाप्त किया जा सकेगा।
- एलईडी, वायरिंग, लेबर और अन्य मदों का अलग से भुगतान नहीं मिलेगा।
- केवल मरम्मत, परीक्षण और सत्यापन के बाद ही भुगतान किया जाएगा।
- ठेकेदार को हर माह बिल प्रस्तुत करना होगा, अग्रिम भुगतान नहीं मिलेगा।
शहरवासियों को मिलेगा बेहतर लाभ
नगर निगम का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से स्ट्रीट लाइटों की खराबी का समय पर समाधान होगा, गुणवत्ता में सुधार आएगा और शहर की सड़कें अधिक सुरक्षित एवं रोशन रहेंगी। साथ ही ठेकेदारों की जवाबदेही भी पहले की तुलना में काफी बढ़ेगी।



