अमेरिका में हथियारों की कमी! ट्रंप प्रशासन बढ़ाएगा मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम का उत्पादन

दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्माता और निर्यातक देशों में शामिल अमेरिका अब अपने रक्षा भंडार (Defense Stockpile) को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ईरान के साथ बढ़े तनाव और अन्य वैश्विक संघर्षों में भारी मात्रा में हथियारों के उपयोग के बाद अमेरिका के कई महत्वपूर्ण हथियारों का स्टॉक घटने लगा है। इसी को देखते हुए राष्ट्रपति Donald Trump का प्रशासन रक्षा उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस में प्रमुख रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर हथियारों के उत्पादन और खरीद को लेकर चर्चा की जाएगी। इस दौरान एयर डिफेंस और मिसाइल सिस्टम के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
पैट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर का उत्पादन बढ़ेगा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनी Lockheed Martin के साथ हुए समझौतों के तहत Patriot Interceptor मिसाइलों के उत्पादन को तीन गुना और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाले THAAD Interceptor के उत्पादन को चार गुना तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
इसके अलावा RTX Corporation (पूर्व में Raytheon Technologies) के साथ बहुवर्षीय समझौतों के जरिए Tomahawk Cruise Missile और AMRAAM Air-to-Air Missile के उत्पादन में भी बढ़ोतरी की जाएगी। हालांकि इन समझौतों को फिलहाल “फ्रेमवर्क एग्रीमेंट” का दर्जा दिया गया है और इन्हें अभी अंतिम अनुबंधों में बदला जाना बाकी है।
युद्धों और सहयोगियों को सप्लाई से घटा स्टॉक
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में अमेरिका ने विभिन्न सैन्य अभियानों में बड़ी मात्रा में हथियारों का उपयोग किया है। इसके साथ ही उसने अपने सहयोगी देशों को भी बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरण और मिसाइलें उपलब्ध कराई हैं। इससे एयर डिफेंस सिस्टम और प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ा है।
रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अमेरिका को अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना होगा। इसी उद्देश्य से मिसाइल, इंटरसेप्टर और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियों के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
क्यों अहम है यह कदम?
अमेरिका लंबे समय से वैश्विक रक्षा बाजार में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में उसके रणनीतिक हथियारों के स्टॉक में कमी की खबरें रक्षा विशेषज्ञों और सहयोगी देशों दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। नए उत्पादन समझौतों के जरिए अमेरिका न केवल अपने भंडार को फिर से भरना चाहता है, बल्कि भविष्य की संभावित सैन्य चुनौतियों के लिए भी तैयारी कर रहा है।



