पोषण वाटिका से मजबूत होगी घरेलू पोषण सुरक्षा, 62 किसानों ने लिया प्रशिक्षण

रायपुर। आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा किसानों में घरेलू पोषण सुरक्षा, आहार विविधता और सुरक्षित खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “पोषण वाटिका” विषय पर क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बरोंदा, मुर्रा, बेलटुकरी, देवगांव, कुर्रा एवं कथुरड गांवों के लगभग 62 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 10 महिला किसान भी शामिल रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ आईसीएआर-एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किया। उन्होंने कहा कि घर में ताजी, पौष्टिक और सुरक्षित सब्जियों एवं फलों की उपलब्धता परिवार के स्वास्थ्य तथा पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार को स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक बताते हुए किसानों से अपने घरों में पोषण वाटिका विकसित करने का आह्वान किया।
डॉ. राय ने कहा कि जिन परिवारों के पास पोषण वाटिका के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, वहां आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी ऐसी वाटिकाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे समुदाय स्तर पर पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वाटिका प्रबंधन पर प्रशिक्षण
किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक, ने स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पोषण वाटिका की स्थापना एवं प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्षा की तीव्रता कम होने के बाद फलदार पौधों के रोपण के लिए उचित आकार के गड्ढे तैयार किए जाएं और उनमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर पौधों का रोपण किया जाए। उन्होंने जलभराव से बचाव और उचित जल निकास सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
अधिक नमी की स्थिति में सब्जियों की खेती के लिए ऊंची उठी हुई क्यारियां तैयार करने की सलाह दी गई। साथ ही, पौधों की प्रारंभिक अवस्था में उचित नर्सरी देखभाल, पोषण एवं सिंचाई प्रबंधन के बारे में किसानों को जानकारी दी गई।
पर्यावरण-अनुकूल कीट एवं रोग प्रबंधन पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान सब्जियों में कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए स्थानीय और पारंपरिक पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाने पर जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि ऐसे उपायों से अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को कम करते हुए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है।
कार्यक्रम में पोषण वाटिका के प्रमुख उद्देश्यों की जानकारी भी दी गई। इनमें ताजा, पौष्टिक एवं सुरक्षित भोजन की उपलब्धता, आहार विविधता को बढ़ावा देना, पोषक तत्वों की कमी को कम करना, रसोई के जैविक कचरे से खाद तैयार करना तथा कम लागत में घरेलू खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रमुख हैं।
किसानों को फलदार पौधे और सब्जियों के बीज वितरित
कार्यक्रम के दौरान किसानों को उन्नत किस्म के अमरूद एवं नींबू के पौधे तथा लगभग 18 प्रकार की सब्जियों के बीज वितरित किए गए। इनमें पालक, धनिया, मेथी, चौलाई, भिंडी, लोबिया, तोरी, लौकी, ककड़ी, सेम और मूली सहित अन्य सब्जियों के बीज शामिल थे।
किसानों को इन पौधों एवं बीजों का उपयोग अपने घरों में पोषण वाटिका विकसित करने के लिए करने हेतु प्रेरित किया गया। इससे परिवारों को वर्षभर विविध प्रकार की ताजी सब्जियां एवं फल उपलब्ध कराने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में सरपंच श्रीमती कंचन गायकवाड़ एवं श्री संतोष कुर्रे भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. के. सी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक ने किया।
आईसीएआर-एनआईबीएसएम की यह पहल किसानों के क्षमता निर्माण के साथ-साथ सुरक्षित खाद्य उत्पादन, आहार विविधता और घरेलू पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



