महाराष्ट्र FDA कमिश्नर बनते ही एक्शन में IAS तुकाराम मुंढे, नामचीन रेस्तरां के बाद 10 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के लाइसेंस रद्द

मुंबई: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त का पद संभालने के बाद IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने राज्यभर में खाद्य और दवा कारोबार से जुड़ी इकाइयों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया है। निरीक्षण के दौरान गंभीर खामियां मिलने पर कई प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि 10 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए हैं।
रेस्तरां और क्लबों पर भी FDA की कार्रवाई
तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA की टीम ने मुंबई के कई नामचीन रेस्तरां और क्लबों का निरीक्षण किया। स्वच्छता में लापरवाही, कॉकरोच संक्रमण और जरूरी दस्तावेजों की कमी जैसी गंभीर खामियां पाए जाने पर कार्रवाई की गई।
कार्रवाई की जद में नूर मोहम्मदी होटल, शालीमार रेस्तरां, के. रुस्तम एंड कंपनी, क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI), विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब और जुहू जिमखाना जैसे प्रतिष्ठान शामिल हैं।
434 आयुर्वेदिक इकाइयों का निरीक्षण
FDA का अभियान अब आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं तक भी पहुंच गया है। विभाग ने महाराष्ट्र में 434 लाइसेंस प्राप्त आयुर्वेदिक इकाइयों का निरीक्षण किया। यह कार्रवाई ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (Schedule T) के नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद की गई।
जांच के दौरान कई इकाइयों में योग्य तकनीकी स्टाफ की कमी, गुणवत्ता नियंत्रण की उचित व्यवस्था नहीं होना, अस्वच्छ परिसर, गलत लेबलिंग और कच्चे माल से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी कमियां सामने आईं।
इन खामियों के आधार पर FDA ने 135 निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए। वहीं गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर 10 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए।
21 साल की सेवा में 25 बार तबादला
तुकाराम मुंढे अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए पहले से ही चर्चित रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। यही वजह है कि उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के तौर पर बनी है, जो प्रशासनिक स्तर पर सख्त फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं।
किसान परिवार से UPSC तक का सफर
तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताड़सोना गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने जिला परिषद स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की और आगे चलकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से स्नातक किया।
उन्होंने वर्ष 2004 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की और 2005 बैच के IAS अधिकारी बने।
सोलापुर में ‘वाटर मैन’ के नाम से मिली पहचान
प्रशासनिक सेवा के दौरान तुकाराम मुंढे ने कई जिलों और शहरों में जमीनी स्तर पर काम किया। वर्ष 2014 में सोलापुर में जल संकट से निपटने के लिए उन्होंने ‘जलयुक्त शिवार’ अभियान पर जोर दिया। इसके बाद उन्हें ‘महाराष्ट्र का वाटर मैन’ भी कहा जाने लगा।
नवी मुंबई नगर निगम आयुक्त रहते हुए उन्होंने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई, संपत्ति कर वसूली में सुधार और जमीनी निरीक्षण पर जोर दिया। अब FDA आयुक्त के तौर पर उनकी सख्त कार्यशैली खाद्य और दवा सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी दिखाई दे रही है।



