छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटरिंग से डिजिटल हो रही बिजली व्यवस्था, रोजाना खपत की मिलेगी सटीक जानकारी

CSPDCL Smart Meter: छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में स्मार्ट मीटरिंग का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को अपनी रोजाना बिजली खपत, मीटर रीडिंग, लोड और बिल से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से मिल रही है। इससे बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं को बिजली खर्च को समझने और नियंत्रित करने में भी मदद मिल रही है।

रोजाना देख सकेंगे बिजली की खपत

स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर नियमित नजर रख सकते हैं। वर्तमान खपत के साथ पिछले 12 महीनों की बिजली खपत का रिकॉर्ड और चार्ट भी देखा जा सकता है।

इसके अलावा स्वीकृत और उपयोग किए जा रहे लोड का मासिक विवरण, बिजली खपत और उससे संबंधित चार्ज की जानकारी भी उपलब्ध रहती है। इससे उपभोक्ता यह समझ सकता है कि उसके घर या परिसर में किस समय और कितनी बिजली खर्च हो रही है।

मीटर रीडिंग में मानवीय चूक की संभावना कम

पारंपरिक मीटर व्यवस्था में रीडिंग दर्ज करने के दौरान मानवीय गलती की संभावना बनी रहती थी। स्मार्ट मीटर डिजिटल तरीके से बिजली खपत का डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे रीडिंग से जुड़ी गलतियों को कम करने में मदद मिलती है।

इसके साथ ही औसत बिल जैसी स्थिति में भी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। मीटर खराब या बंद होने जैसी जानकारी भी सिस्टम के जरिए समय पर सामने आने की सुविधा उपलब्ध है।

बिजली बिल के लिए दफ्तर के चक्कर कम

स्मार्ट मीटरिंग के कारण उपभोक्ताओं को बिजली खपत और बिल से जुड़ी कई जानकारियां डिजिटल माध्यम से मिल रही हैं। इससे सामान्य जानकारी या खपत की जांच के लिए बिजली कार्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है।

वहीं, किसी तकनीकी या बिल संबंधी समस्या की स्थिति में उपभोक्ता संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। विभाग की ओर से स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और व्यवस्था की निगरानी के लिए इंजीनियरों की टीम द्वारा सर्वे और जांच भी की जा रही है।

प्रदेश के 54 प्रतिशत क्षेत्र में स्मार्ट मीटरिंग

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटरिंग का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर समेत कई जिलों के कस्बों और ब्लॉक स्तर तक स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों को मिलाकर करीब 54 प्रतिशत क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपभोक्ताओं को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने का काम जारी है।

‘मोर स्मार्ट बिजली’ ऐप से मोबाइल पर मिलेगी जानकारी

स्मार्ट मीटर के साथ डिजिटल सेवाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। उपभोक्ता ‘मोर स्मार्ट बिजली’ ऐप के जरिए अपनी दैनिक बिजली खपत पर नजर रख सकते हैं।

मोबाइल पर खपत का डेटा उपलब्ध होने से यह पता लगाना आसान हो सकता है कि बिजली का इस्तेमाल सामान्य से अधिक कहां हो रहा है। इसके आधार पर अनावश्यक बिजली खपत को कम किया जा सकता है और मासिक बिजली खर्च को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

RDSS के तहत 8,126 करोड़ रुपये का स्वीकृत परिव्यय

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटरिंग को व्यापक बिजली सुधार योजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। स्मार्ट मीटरिंग और वितरण ढांचे से जुड़े कार्यों को मिलाकर प्रदेश के लिए 8,126 करोड़ रुपये का स्वीकृत परिव्यय बताया गया है।

वहीं, 16 मार्च 2026 तक RDSS के तहत छत्तीसगढ़ को 1,168.78 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके थे। यह योजना केवल स्मार्ट मीटर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।

स्मार्ट मीटर के साथ मजबूत होगा बिजली नेटवर्क

केंद्र सरकार की RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत स्मार्ट मीटरिंग के अलावा पुराने कंडक्टर बदलने, सब-स्टेशन और ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाने, नए ट्रांसफॉर्मर एवं सब-स्टेशन स्थापित करने और फीडर सेग्रीगेशन जैसे कार्य भी शामिल हैं।

इन कार्यों का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था की दक्षता, विश्वसनीयता और क्षमता बढ़ाना है। स्मार्ट मीटर इस व्यापक आधुनिकीकरण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गांवों में भी बदल रहा बिजली इस्तेमाल का तरीका

स्मार्ट मीटर का लाभ केवल शहरी उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को समझने और नियंत्रित करने के लिए डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पहले जहां महीने के अंत में बिजली बिल आने के बाद खपत का अंदाजा लगाया जाता था, वहीं अब स्मार्ट मीटर और डिजिटल ऐप के जरिए नियमित रूप से बिजली इस्तेमाल की निगरानी संभव है। इससे परिवार अपने बिजली बजट को बेहतर तरीके से निर्धारित कर सकते हैं।

बिजली बचत में मददगार हो सकता है स्मार्ट मीटर

स्मार्ट मीटर से मिलने वाले डेटा का सही इस्तेमाल बिजली बचाने में भी मदद कर सकता है। यदि किसी घर में किसी खास समय या उपकरण के कारण बिजली की खपत अधिक हो रही है, तो उपभोक्ता उपलब्ध डेटा के आधार पर इसकी पहचान कर सकता है।

अनावश्यक उपकरण बंद करने, बिजली के इस्तेमाल का समय बदलने और अधिक बिजली खपत करने वाले उपकरणों के उपयोग को नियंत्रित करने से बिजली की बचत की जा सकती है। इससे मासिक बिजली बिल और घरेलू खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

समस्या होने पर 1912 पर करें संपर्क

स्मार्ट मीटर से जुड़ी किसी भी जानकारी या समस्या के लिए उपभोक्ता बिजली विभाग की हेल्पलाइन 1912 पर संपर्क कर सकते हैं। विभाग के अनुसार उपभोक्ताओं की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपलब्ध हैं।

डिजिटल बिजली व्यवस्था की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटरिंग के बढ़ते नेटवर्क के साथ बिजली वितरण व्यवस्था धीरे-धीरे डिजिटल दौर में प्रवेश कर रही है। इसका उद्देश्य केवल पुराने मीटरों को बदलना नहीं, बल्कि बिजली खपत में पारदर्शिता बढ़ाना, वितरण नेटवर्क को मजबूत करना और उपभोक्ताओं को अपने बिजली खर्च पर बेहतर नियंत्रण देना है।

शहरों से लेकर गांवों तक स्मार्ट मीटरिंग के विस्तार के साथ आने वाले समय में उपभोक्ताओं के लिए बिजली खपत को समझना, उसकी निगरानी करना और जरूरत के अनुसार बिजली बचाना पहले से आसान हो सकता है।

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