भारतमाला परियोजना घोटाला: ED-EOW की कार्रवाई तेज, 24 करोड़ की बेनामी संपत्तियां अटैच

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की कार्रवाई तेज हो गई है। जांच एजेंसियों ने घोटाले की रकम से खरीदी गई करीब 24 करोड़ रुपये मूल्य की बेनामी चल एवं अचल संपत्तियों को अटैच किया है। इनमें जमीन, अन्य प्रॉपर्टी और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद इन संपत्तियों की नीलामी की जाएगी और प्राप्त राशि सरकारी खाते में जमा कराई जाएगी। मामले की जांच फिलहाल ED और EOW द्वारा की जा रही है।
80 करोड़ रुपये के घोटाले के मिले संकेत
भारतमाला परियोजना की जांच के दौरान एजेंसियों को करीब 80 करोड़ रुपये के घोटाले के इनपुट मिले हैं। जांच में सामने आया है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले कथित मिलीभगत के तहत जमीनों का बैक डेट में विभाजन किया गया और रिकॉर्ड में बदलाव कर अधिक मुआवजा प्राप्त किया गया।
एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में सरकारी अधिकारियों, जमीन कारोबारियों और दलालों की भूमिका रही है, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
कई अधिकारी और जमीन कारोबारी कार्रवाई के दायरे में
मामले में EOW ने तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) एवं सक्षम प्राधिकारी निर्भय कुमार साहू को मुख्य आरोपी माना है। उन पर पद का दुरुपयोग कर राजस्व अभिलेखों में हेरफेर करने और पात्रता से अधिक मुआवजा दिलाने का आरोप है।
इसके अलावा तत्कालीन तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी, जमीन दलालों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इनमें से कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
वहीं, ED ने मामले में कथित मास्टरमाइंड और प्रमुख जमीन कारोबारी जयप्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों का पता लगाया गया है।
56 लाख की जमीन पर 9.83 करोड़ रुपये मुआवजे का आरोप
जांच के दौरान सामने आया है कि आरोपी जयप्रकाश गांधी ने कथित रूप से लगभग 56 लाख रुपये मूल्य की जमीन के बदले करीब 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया। एजेंसियां इस लेन-देन और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
नीलामी के जरिए होगी वसूली
जांच एजेंसियों का कहना है कि अटैच की गई संपत्तियों के संबंध में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायालय की अनुमति से उनकी नीलामी कराई जाएगी। इसके माध्यम से घोटाले से संबंधित राशि की वसूली की जाएगी।
फिलहाल मामले की जांच ED, EOW और प्रशासनिक स्तर पर गठित अन्य जांच एजेंसियों द्वारा जारी है। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।



