अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- हमने ईरान को परमाणु हथियार से हमेशा के लिए रोका

वॉशिंगटन | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया संघर्ष और उसके बाद हुए शांति समझौते के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने वह हासिल किया है, जो पहले कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं कर पाया।

‘फेथ एंड फ्रीडम कोएलिशन’ के ‘रोड टू मेजॉरिटी’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि हाल ही में हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।

“ईरान के पास कभी नहीं होगा परमाणु हथियार”

ट्रंप ने कहा, “पिछले सप्ताह हमने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि ईरान के पास अब कभी परमाणु हथियार नहीं होगा।”

ईरानी सेना की क्षमता पर किया बड़ा दावा

अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य ताकत गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और रक्षा उत्पादन क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि—

  • ड्रोन क्षमता में 82% की कमी आई है।
  • मिसाइल क्षमता 80% घट गई है।
  • रॉकेट लॉन्चर क्षमता में 90% की गिरावट आई है।

हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

ईरानी नेतृत्व पर भी दिया बयान

ट्रंप ने कहा कि संघर्ष के दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भी बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के नेतृत्व को गंभीर झटका लगा है और अब वहां नेतृत्व संभालने को लेकर अनिश्चितता का माहौल है।

कासिम सुलेमानी का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुलेमानी अमेरिकी सैनिकों पर हुए कई हमलों के लिए जिम्मेदार था और उसके खिलाफ की गई कार्रवाई उनके प्रशासन की बड़ी उपलब्धियों में से एक थी।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि सुलेमानी की मौत के बाद ईरान के भीतर भी कई लोग राहत महसूस कर रहे थे। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

तनाव पूरी तरह खत्म नहीं

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में शांति समझौता हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच बयानबाजी और एक-दूसरे पर आरोपों के चलते क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों पर वैश्विक स्तर पर नजर बनी रहेगी।

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