निर्जला एकादशी व्रत का पारण कल, जानें कब करें जल ग्रहण और क्या है सही विधि

निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। इस व्रत में श्रद्धालु पूरे दिन और रात बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

कब होगा व्रत का पारण?

पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून, शुक्रवार को सुबह 5:41 बजे से 8:25 बजे तक किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्धारित समय के भीतर ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

पारण से पहले करें ये कार्य

व्रत समाप्त करने से पहले श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पारण से पूर्व—

  • निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें।
  • विष्णु जी की आरती करें।
  • ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।

कैसे करें व्रत का पारण?

पारण के समय सबसे पहले भगवान विष्णु को भोग अर्पित करें। इसके बाद जल ग्रहण कर व्रत खोलें। कई श्रद्धालु तुलसी युक्त जल पीकर या फलाहार ग्रहण कर पारण करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा जल का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

निर्जला एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास करने से पापों का नाश होता है तथा सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

नोट: व्रत और पारण का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है। श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग या विद्वान आचार्य से समय की पुष्टि अवश्य कर लें।

Related Articles

Back to top button