स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता 80 मिनट बाद रुकी, रणनीति पर मंथन के लिए लौटे प्रतिनिधिमंडल

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच जारी महत्वपूर्ण वार्ता करीब 80 मिनट बाद अस्थायी रूप से रोक दी गई। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल आंतरिक विचार-विमर्श और आगे की रणनीति तय करने के लिए अपने-अपने कमरों में लौट गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान विभिन्न प्रस्तावों और अगले चरण की रूपरेखा पर चर्चा हुई। फिलहाल वार्ता के टूटने जैसी कोई स्थिति नहीं है और दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

कई चरणों में हो रही बातचीत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्विट्जरलैंड में आयोजित यह वार्ता कई अलग-अलग सत्रों में संचालित की जा रही है। पहले चरण में लेबनान की स्थिति और संभावित युद्धविराम पर चर्चा हुई। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श होना है, जबकि तीसरे चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर बातचीत की जाएगी।

रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ रही चर्चा

बैठक से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वार्ता सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है। बताया गया कि बैठक शुरू होने से पहले ईरान के विदेश मंत्री ने कतर के प्रधानमंत्री के साथ भी चर्चा की थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकारों के बैठक कक्ष से बाहर जाने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल दोबारा बातचीत में शामिल हुआ। माना जा रहा है कि ईरानी पक्ष मीडिया की अतिरिक्त मौजूदगी से बचते हुए वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता था।

अहम मुद्दों पर फोकस

बैठक में लेबनान युद्धविराम, ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो रही है। इसके अलावा प्रतिबंधों में संभावित राहत और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।

समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि इससे पहले हुई कई कूटनीतिक कोशिशों में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था।

फिलहाल किसी औपचारिक समझौते या निर्णय की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा बातचीत जारी रखना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे विवादित मुद्दों का कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं।

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