अमेरिका ने ईरान के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौता मसौदा आखिरकार सार्वजनिक कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रविवार को घोषित किए गए इस समझौते को लकेर बढ़ते दबाव के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने एक विशेष कॉन्फ्रेंस कॉल के माध्यम से मसौदा पढ़कर मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सुनाया। बताया जा रहा है कि इस पर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है। हस्ताक्षर के तुरंत बाद दोनों देशों को अंतिम और व्यापक समझौते की शर्तों पर विस्तृत बातचीत के लिए 60 दिन का समय मिलेगा, जिसे आपसी सहमति से और बढ़ाया भी जा सकता है। हालांकि ईरान की ओर से अभी तक इस दस्तावेज पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
इस दस्तावेज के जारी होने के साथ ही कई दिनों से चले आ रहे अनिश्चय और सस्पेंस का अंत हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत दोनों देशों ने युद्ध समाप्त करने, शांति स्थापित करने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए 14-पॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति जताई है। यह प्रारंभिक समझौता लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष विराम, नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने, प्रतिबंधों में राहत और पुनर्निर्माण सहायता जैसे प्रमुख मुद्दों को शामिल करता है।
समझौते के प्रमुख 14 पॉइंट
1. दोनों पक्ष (अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी) लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करते हैं। कोई भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई या बलप्रयोग की धमकी नहीं दी जाएगी।
2. दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
3. दोनों पक्ष अधिकतम 60 दिनों (आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है) के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत करेंगे।
4. समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा और 30 दिनों के अंदर ईरान के लिए समुद्री यातायात को पूर्ण क्षमता पर बहाल करेगा।
5. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना टोल के फिर से खोल दिया जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल होगी।
6. अमेरिका ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाएगा, ताकि ईरान तेल निर्यात कर सके।
7. ईरान की जमी हुई संपत्तियां (अरबों डॉलर) जारी की जाएंगी।
8. ईरान के युद्ध क्षति की भरपाई के लिए $300 बिलियन का पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास फंड बनाया जाएगा।
9. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वर्तमान स्थिति बनी रहेगी, जबकि अंतिम समझौते में इस पर विस्तृत चर्चा होगी।
10. दोनों पक्ष क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए सहयोग करेंगे।
11. लेबनान में संघर्ष विराम को लागू किया जाएगा।
12. अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य तैनाती पर पुनर्विचार करेगा।
13. दोनों पक्ष मानवीय सहायता और आर्थिक सहयोग बढ़ाएंगे।
14. यह MoU अंतिम समझौते का आधार बनेगा, जिसमें सभी विवरणों पर आगे बातचीत होगी।
यह समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा, खासकर ऊर्जा बाजार में। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “दुनिया भर में अवसाद रोकने वाला” कदम बताया है। ईरान ने भी इसे क्षेत्रीय शांति के लिए सकारात्मक बताया है।