छत्तीसगढ़ में बढ़ेगा बासमती धान का रकबा, किसानों की आय बढ़ाने सरकार की नई पहल


रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए बासमती धान की खेती के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इस संबंध में कृषि विकास मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ. संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
बैठक में कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि किसानों के हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी बासमती खेती
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की विभिन्न किस्मों का उत्पादन होता है, लेकिन बासमती और अन्य सुगंधित चावलों की अंतरराष्ट्रीय तथा यूरोपीय बाजारों में विशेष मांग है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु और तापमान बासमती उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती धान का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।
किसानों को मिलेगा बायबैक और विपणन सहयोग
बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने राज्य में बासमती धान के उत्पादन और क्षेत्र विस्तार के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सुगंधित चावल के निर्यात को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।
उत्पादन से निर्यात तक बनेगी समन्वित व्यवस्था
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि बासमती धान के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात के लिए एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकेगा।
सरकार का मानना है कि बासमती धान की खेती को बढ़ावा मिलने से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य के कृषि निर्यात को भी नई दिशा मिलेगी।



