छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लागू, मीटर रीडरों के भविष्य पर संकट के बादल

अप्रेल 18, 2026 | छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर (रिचार्ज आधारित प्रणाली) लागू होने के बाद से हजारों मीटर रीडरों के भविष्य पर संकट के बादल घेरने लगे हैं। सरकारी आदेशों और नीति की अस्पष्टता के कारण इन कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।

RTI के तहत खुलासा:

जिला गरियाबंद के अशोक कुमार साहू द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि ऊर्जा विभाग ने स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद मीटर रीडरों के भविष्य, वैकल्पिक रोजगार, सेवा निरंतरता और आय सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नीति या निर्णय नहीं लिया है। विभाग ने मार्च 2026 में जारी अपने आदेश में यह माना कि इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं हैं।

हजारों परिवारों की चिंता:

मीटर रीडर वर्षों से बिजली विभाग के लिए महत्वपूर्ण कार्यों जैसे कि राजस्व वसूली, बिलिंग और डिस्कनेक्शन में लगे हुए हैं। स्मार्ट मीटर प्रणाली के आने से उनकी भूमिका में बदलाव आने की संभावना है, लेकिन इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। इससे उनके परिवारों के सामने रोजगार की अनिश्चितता की समस्या उत्पन्न हो गई है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी और आक्रोश:

सूत्रों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने भी इस मामले में टिप्पणी की है कि कर्मचारियों को अस्थायी स्थिति में रखना उचित नहीं है। मीटर रीडरों का कहना है कि वे विभाग का अभिन्न हिस्सा हैं, और सभी अभियानों में जिम्मेदारी से काम करते हैं। फिर भी, उनके भविष्य को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

मीटर रीडरों का आक्रोश:

मीटर रीडरों में गहरी निराशा और आक्रोश है। वे कहते हैं—“हमने विभाग के लिए वर्षों तक मेहनत की है, लेकिन अब हमें अपने भविष्य को लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। हमें न्याय चाहिए।”

हाईकोर्ट जाने की तैयारी:

मीटर रीडरों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट का रुख करने को तैयार हैं।

सवालों का घेरे में सरकार:

  1. क्या मीटर रीडरों को नियमित किया जाएगा?
  2. क्या सरकार इन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी?
  3. क्या सरकार इन कर्मचारियों को उनकी सेवा के लिए न्याय देगी, या उन्हें अनिश्चितता में छोड़ दिया जाएगा?

निष्कर्ष:

स्मार्ट मीटर प्रणाली जहां एक ओर राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को तकनीकी रूप से आधुनिक बना रही है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े जमीनी कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार की नीति की अस्पष्टता एक बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बनता जा रहा है। इस मुद्दे पर सरकार को शीघ्र निर्णय लेना जरूरी है, ताकि मीटर रीडरों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

Related Articles

Back to top button