ईथा’ टाइटल विवाद पर विठाबाई नारायणगांवकर के परिवार का बड़ा बयान, बेटी बोलीं- हमें कोई आपत्ति नहीं

मुंबई। अभिनेत्री श्रद्धा कपूर की आगामी फिल्म ‘ईथा’ (Eetha) का टीजर रिलीज होने के बाद इसके टाइटल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। फिल्म के नाम पर उठे सवालों के बीच अब मशहूर लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की सबसे बड़ी बेटी मंगला बनसोडे करावडीकर ने परिवार की ओर से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके परिवार को फिल्म के टाइटल से कोई आपत्ति नहीं है।
दरअसल, फिल्म के टीजर में श्रद्धा कपूर का विठाबाई नारायणगांवकर के रूप में लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर चर्चा हुई। हालांकि, फिल्म का नाम ‘ईथा’ रखे जाने को लेकर कुछ राजनीतिक संगठनों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में विरोध की बात सामने आई थी।
‘ईथा’ नाम से हमें कोई दिक्कत नहीं: मंगला बनसोडे
75 वर्षीय मंगला बनसोडे करावडीकर, जो स्वयं एक प्रतिष्ठित तमाशा कलाकार और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हैं, ने कहा कि ‘ईथा’ नाम उनकी मां विठाबाई को गांवों में प्यार से पुकारने का नाम था।
उन्होंने बताया कि फिल्म के नाम को लेकर परिवार में किसी तरह की नाराजगी नहीं है।
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा,
“हमें फिल्म के टाइटल से कोई आपत्ति नहीं है। मैंने मोहित से भी बात की है और उनसे अनुरोध किया है कि वे इस मुद्दे पर आगे कोई बयान न दें। मेरी मां जहां-जहां कार्यक्रम करने जाती थीं, वहां लोग उन्हें प्यार से ‘ईथा’ कहकर बुलाते थे। इसलिए यह नाम बिल्कुल उचित है।”
फिल्म बनने से पहले हुई थी परिवार से चर्चा
मंगला बनसोडे ने बताया कि फिल्म के निर्देशक लक्ष्मण उतेकर रिसर्च के दौरान परिवार से मिलने आए थे। उस समय उन्होंने फिल्म और विठाबाई के जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की थी।
उन्होंने कहा कि वह सात साल की उम्र से मंच पर प्रस्तुति दे रही हैं और बचपन से लोगों को अपनी मां को ‘ईथा’ कहकर बुलाते हुए सुनती आई हैं।
मंगला ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इस फिल्म के जरिए नई पीढ़ी विठाबाई नारायणगांवकर के संघर्ष, कला और लोक संस्कृति में उनके योगदान को जान सकेगी।
टाइटल को लेकर क्यों हुआ था विवाद?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के फिल्म एवं सांस्कृतिक विभाग ने फिल्म के नाम ‘ईथा’ पर आपत्ति जताई है।
पार्टी का कहना था कि फिल्म महान लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन पर आधारित है, इसलिए इसका नाम ‘विठाबाई’ या ‘विठा’ रखा जाना चाहिए था।
एनसीपी के फिल्म एवं सांस्कृतिक विभाग के महाराष्ट्र अध्यक्ष बाबासाहेब पाटिल ने कहा था कि विठाबाई की विरासत का सम्मान करते हुए फिल्म के शीर्षक में उनका नाम होना चाहिए।
कौन थीं विठाबाई नारायणगांवकर?
विठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की लोककला लावणी और तमाशा की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में गिनी जाती हैं। अपनी दमदार मंचीय प्रस्तुति और अनूठी कला के दम पर उन्होंने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में अलग पहचान बनाई।
भारतीय लोककला में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें 1957 और 1990 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था।
हालांकि, अपार लोकप्रियता के बावजूद जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आज उनके परिवार के कई सदस्य लावणी और तमाशा की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
फिलहाल, मंगला बनसोडे के बयान के बाद फिल्म ‘ईथा’ के टाइटल को लेकर चल रही बहस को काफी हद तक विराम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



