छत्तीसगढ़ में तबादलों पर ब्रेक! जून खत्म होने को, सरकार का फैसला बाकी; अब मुख्य सचिव से मिलेंगे कर्मचारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों का तबादला नीति (Transfer Policy) को लेकर इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। हर साल मई-जून के दौरान जारी होने वाली स्थानांतरण नीति इस बार जून समाप्त होने तक भी जारी नहीं हो सकी है। नीति में हो रही देरी से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है और कर्मचारी संगठन सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।

मुख्य सचिव से मुलाकात करेगा कर्मचारी संगठन

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने तबादला नीति जल्द जारी करने की मांग तेज कर दी है। फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि समय पर स्थानांतरण नीति जारी होने से कर्मचारियों को पारिवारिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर सुविधा मिलती है।

उन्होंने बताया कि विशेष रूप से दिव्यांग, आर्थिक रूप से कमजोर और लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को इस नीति का बेसब्री से इंतजार रहता है। फेडरेशन जल्द ही मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर तत्काल तबादला नीति जारी करने की मांग करेगा।

मई-जून को इसलिए माना जाता है सबसे उपयुक्त समय

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि स्थानांतरण के लिए मई और जून का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान स्कूल-कॉलेजों में अवकाश रहता है, जिससे कर्मचारियों को बच्चों के नए स्कूलों में प्रवेश कराने और परिवार के साथ नए स्थान पर व्यवस्थित होने में आसानी होती है। समय पर नीति जारी होने से विभागीय कार्य भी सुचारु रूप से संचालित होते हैं।

वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारी कर रहे इंतजार

प्रदेश के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं और स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई कर्मचारी पारिवारिक परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं के कारण तबादला चाहते हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण नीति केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नीति में देरी से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

पिछले वर्ष 4 जून को मिली थी मंजूरी

पिछले वर्ष राज्य सरकार ने 4 जून को कैबिनेट बैठक में स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी थी। इसके तहत जिला स्तर पर 14 जून से 25 जून तक प्रभारी मंत्री की अनुमति से तथा राज्य स्तर पर विभागीय मंत्री की स्वीकृति से तबादले किए गए थे।

पिछली नीति में न्यूनतम दो वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को स्थानांतरण के लिए पात्र माना गया था। वहीं गंभीर बीमारी, मानसिक या शारीरिक दिव्यांगता तथा सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पहले वाले कर्मचारियों को विशेष छूट प्रदान की गई थी।

तबादलों की सीमा भी थी निर्धारित

पिछली स्थानांतरण नीति के तहत तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के अधिकतम 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अधिकतम 15 प्रतिशत तक तबादले किए जाने का प्रावधान था। अनुसूचित क्षेत्रों से स्थानांतरण के मामलों में एवजीदार (रिप्लेसमेंट) की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई थी।

अब प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारियों की नजर राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही स्थानांतरण नीति जारी कर कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही प्रतीक्षा समाप्त करेगी।

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