‘मोदी की गारंटी’ याद दिलाने रायपुर की सड़कों पर उतरे हजारों शिक्षक, 7 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबित मांगों को लेकर सहायक शिक्षकों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक एवं समग्र शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे हजारों शिक्षकों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया और सरकार से अपनी 7 सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
वेतन विसंगति बना सबसे बड़ा मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि वे वर्षों से वेतन विसंगति की समस्या से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान “मोदी की गारंटी” के तहत वेतन संबंधी समस्याओं के समाधान का वादा किया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी मुद्दे को लेकर शिक्षकों ने सरकार से वादा निभाने की मांग की।
शिक्षकों की 7 प्रमुख मांगें
फेडरेशन ने सरकार के समक्ष सात सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—
- वेतन विसंगति का तत्काल निराकरण।
- प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना।
- पदोन्नति में वरिष्ठता का लाभ।
- विभागीय टीईटी (TET) परीक्षा का नियमित आयोजन।
- एकल शिक्षकीय स्कूलों में नए शिक्षकों की नियुक्ति।
- VSK ऐप से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान।
- लंबित प्रशासनिक मामलों का शीघ्र निराकरण।
सरकार की चुप्पी पर जताई नाराजगी
फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार राठौर ने कहा कि कई बार ज्ञापन सौंपने और चर्चा के बावजूद सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी जायज मांगों के लिए शिक्षकों को बार-बार आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द वार्ता कर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और व्यापक रूप दिया जाएगा।
कई कर्मचारी संगठनों का मिला समर्थन
शिक्षकों के इस प्रदर्शन को सर्व शिक्षक संघ, कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन समेत कई कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते नजर आए।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
रैली के बाद शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सातों मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
राजधानी रायपुर में हुए इस प्रदर्शन के बाद राज्य में शिक्षकों की लंबित मांगें एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गई हैं।



