छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, 70 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वह 72 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस

परिजनों के अनुसार, डॉ. तीजन बाई ने रविवार तड़के करीब 3:15 बजे रायपुर एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य लगातार खराब था और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर मिलते ही कलाकारों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों और उनके लाखों प्रशंसकों ने गहरा शोक व्यक्त किया।

पंडवानी को दिलाई विश्वभर में पहचान

डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति शैली से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी सहित अनेक देशों में प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का परचम लहराया।

उनकी दमदार आवाज, अभिनय और कथावाचन शैली ने पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया तथा भारतीय लोक परंपरा को विश्वभर में सम्मान दिलाया।

13 साल की उम्र से शुरू हुआ कला का सफर

डॉ. तीजन बाई ने महज 13 वर्ष की उम्र में चंद्रखुरी में अपनी पहली सार्वजनिक पंडवानी प्रस्तुति दी थी। उस दौर में महिलाओं के लिए इस शैली में मंच पर प्रस्तुति देना आसान नहीं माना जाता था, लेकिन उन्होंने सामाजिक परंपराओं को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आगे चलकर पंडवानी की सबसे बड़ी प्रतिनिधि बन गईं।

अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से हुईं सम्मानित

लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया। प्रमुख सम्मान इस प्रकार हैं—

  • पद्मश्री (1988)
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995)
  • पद्म भूषण (2003)
  • पद्म विभूषण (2019)

इन सम्मानों ने न केवल उनकी कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को भी वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई।

गनियारी में होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

परिजनों के अनुसार, डॉ. तीजन बाई का पार्थिव शरीर रायपुर से उनके पैतृक गांव गनियारी ले जाया जाएगा। वहां अंतिम दर्शन के बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में प्रशंसक और शुभचिंतक गनियारी पहुंचने लगे हैं।

कला जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

गणराजा म्यूजिक प्रोडक्शन के अजेय कौशिक ने शोक व्यक्त करते हुए कहा,

“कला के प्रति अपने अनन्य समर्पण से ‘पंडवानी’ और हमारे छत्तीसगढ़ का नाम देश-दुनिया में रोशन करने वाली आदरणीय तीजन बाई जी का अवसान हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है। कला जगत के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए हम सदैव कृतज्ञ रहेंगे। उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि।”

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति

डॉ. तीजन बाई का निधन केवल एक महान लोकगायिका का जाना नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस जीवंत सांस्कृतिक विरासत की अपूरणीय क्षति है जिसने पंडवानी जैसी प्राचीन लोककला को विश्व मंच पर सम्मान और पहचान दिलाई। उनकी कला, व्यक्तित्व और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

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