महादेव ऐप केस: सौरभ चंद्राकर के कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का खुलासा, ओमान जांच में सामने आई नई कड़ी

Mahadev Betting App Case: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में फरार आरोपी सौरभ चंद्राकर से जुड़ा एक नया खुलासा सामने आया है। जांच में दावा किया गया है कि उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान के आधार पर इंडोनेशियाई पासपोर्ट बनवाया और उसी के जरिए ओमान में प्रवेश किया। इस कथित फर्जी पासपोर्ट में फोटो सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, जबकि नाम श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस के नाम से मिलता-जुलता दर्ज किया गया है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।

फर्जी पहचान से पासपोर्ट बनाने का दावा

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, बरामद कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट में सौरभ चंद्राकर की तस्वीर लगी है, जबकि नाम में हेरफेर कर “Ajanta Mendis” दर्ज किया गया है, जो श्रीलंका के पूर्व स्पिनर Ajantha Mendis के नाम से मिलता-जुलता है।

दस्तावेजों के मुताबिक यह पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी किया गया और इसकी वैधता 21 जून 2034 तक दर्शाई गई है। पासपोर्ट में जन्मतिथि और जन्मस्थान भी सौरभ चंद्राकर की वास्तविक जानकारी से अलग बताए गए हैं।

जन्मतिथि और नागरिकता में भी कथित विसंगतियां

जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी पासपोर्ट में जन्मतिथि 11 मार्च 1998 दर्ज है, जबकि पहले सामने आए दस्तावेजों में सौरभ चंद्राकर की जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 बताई गई थी।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि ईडी की कार्रवाई के बाद सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल भारत छोड़कर दुबई चले गए थे। बाद में गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण से बचने के लिए कथित तौर पर वानूआतू की नागरिकता हासिल करने की कोशिश की गई थी।

ओमान पुलिस कर रही पूछताछ

फर्जी पासपोर्ट से जुड़े कथित मामले के सामने आने के बाद ओमान पुलिस सौरभ चंद्राकर से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, आवेदन किसके माध्यम से किया गया और इसके पीछे कौन-सा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था।

पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस का मामले से कोई संबंध नहीं

जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस का इस पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है। केवल उनके नाम से मिलता-जुलता नाम कथित तौर पर फर्जी पहचान के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि गिरफ्तारी से बचने और खुद को विदेशी नागरिक के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से यह पहचान क्यों चुनी गई।

इंटरपोल रेड नोटिस पहले से जारी

सौरभ चंद्राकर को वर्ष 2023 में स्थानीय अदालत और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फरार घोषित किया जा चुका है। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है। महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध सट्टेबाजी मामलों में ईडी समेत कई केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं।

भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में हो सकती है देरी

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी पासपोर्ट से जुड़े मामले के कारण सौरभ चंद्राकर के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

ओमान के कानून के तहत पहले वहां फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट से जुड़े मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही स्थानीय अदालत भारत की ओर से किए गए प्रत्यर्पण अनुरोध पर निर्णय ले सकती है।

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