छत्तीसगढ़ में PM आवास की किस्त अटकी, बारिश में अधूरे मकानों में रहने को मजबूर हितग्राही

PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के हजारों हितग्राहियों के सामने पक्के मकान का सपना पूरा करने में रुकावट आ गई है। रायपुर नगर निगम समेत कई नगरीय निकायों में मकान निर्माण की अगली किस्त पिछले चार से पांच महीने से अटकी होने की शिकायत है। राशि नहीं मिलने से कई मकानों का निर्माण बीच में रुक गया है। बारिश के मौसम में अधूरे मकानों में रह रहे परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।
पहली किस्त के बाद रुका निर्माण
हितग्राहियों के अनुसार, योजना के तहत मकान निर्माण के अलग-अलग चरण पूरे होने पर चरणबद्ध तरीके से राशि जारी की जाती है। पहली किस्त मिलने के बाद कई परिवारों ने अपनी जमा पूंजी लगाकर निर्माण शुरू कराया, लेकिन अगली किस्त समय पर नहीं मिलने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
कहीं मकानों की दीवारें तैयार हैं, लेकिन छत का काम अधूरा है। वहीं कई मकानों में प्लास्टर, दरवाजे-खिड़कियां और फर्श का काम बाकी है। लगातार बारिश के बीच खुले और अधूरे मकानों में रह रहे परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किस्त अटकी तो मकान कैसे होगा पूरा?
PMAY-U 2.0 के तहत पात्र हितग्राहियों को प्रति आवास केंद्र से अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) के तहत यह राशि मकान निर्माण के अलग-अलग चरणों से जुड़ी होती है।
ऐसे में एक चरण का भुगतान रुकने पर आगे का निर्माण भी प्रभावित हो जाता है। हितग्राहियों का कहना है कि निर्माण सामग्री और मजदूरी का खर्च बढ़ने के बीच अपने स्तर पर अतिरिक्त राशि जुटाना मुश्किल हो रहा है। समय पर किस्त नहीं मिलने से मकान पूरा करने की समयसीमा भी प्रभावित हो सकती है।
गृह प्रवेश के बाद मिलने वाली राशि में भी देरी
कई हितग्राहियों ने मकान पूरा होने और गृह प्रवेश के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में भी देरी की शिकायत की है। उनका कहना है कि मकान निर्माण पूरा करने और गृह प्रवेश की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें निर्धारित राशि नहीं मिली है।
योजना के तहत निर्धारित अवधि में मकान पूरा करने वाले पात्र हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। भुगतान में देरी को लेकर हितग्राहियों में नाराजगी बढ़ रही है।
केंद्र से सहायता मंजूर, फिर भुगतान में देरी क्यों?
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, 9 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ के 160 BLC प्रोजेक्टों में 11,477 मकानों के लिए 68.86 करोड़ रुपये की पहली किस्त की केंद्रीय सहायता मंजूर की गई थी।
इसके अलावा जून 2026 में छत्तीसगढ़ के लिए 6,882 और 7,434 मकानों से संबंधित दूसरी किस्त की केंद्रीय सहायता जारी करने के आदेश भी दर्ज हैं।
ऐसे में हितग्राहियों के सामने सवाल है कि केंद्र से सहायता मंजूर होने के बावजूद नगरीय निकाय स्तर पर राशि उन तक पहुंचने में देरी क्यों हो रही है। हितग्राहियों को उम्मीद है कि लंबित किस्त जल्द जारी होगी, जिससे बारिश के बीच रुका हुआ मकान निर्माण फिर शुरू हो सके और अधूरे घर पूरे किए जा सकें।
पहली किस्त के बाद रुका निर्माण
हितग्राहियों के अनुसार, योजना के तहत मकान निर्माण के अलग-अलग चरण पूरे होने पर चरणबद्ध तरीके से राशि जारी की जाती है। पहली किस्त मिलने के बाद कई परिवारों ने अपनी जमा पूंजी लगाकर निर्माण शुरू कराया, लेकिन अगली किस्त समय पर नहीं मिलने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
कहीं मकानों की दीवारें तैयार हैं, लेकिन छत का काम अधूरा है। वहीं कई मकानों में प्लास्टर, दरवाजे-खिड़कियां और फर्श का काम बाकी है। लगातार बारिश के बीच खुले और अधूरे मकानों में रह रहे परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किस्त अटकी तो मकान कैसे होगा पूरा?
PMAY-U 2.0 के तहत पात्र हितग्राहियों को प्रति आवास केंद्र से अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) के तहत यह राशि मकान निर्माण के अलग-अलग चरणों से जुड़ी होती है।
ऐसे में एक चरण का भुगतान रुकने पर आगे का निर्माण भी प्रभावित हो जाता है। हितग्राहियों का कहना है कि निर्माण सामग्री और मजदूरी का खर्च बढ़ने के बीच अपने स्तर पर अतिरिक्त राशि जुटाना मुश्किल हो रहा है। समय पर किस्त नहीं मिलने से मकान पूरा करने की समयसीमा भी प्रभावित हो सकती है।
गृह प्रवेश के बाद मिलने वाली राशि में भी देरी
कई हितग्राहियों ने मकान पूरा होने और गृह प्रवेश के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में भी देरी की शिकायत की है। उनका कहना है कि मकान निर्माण पूरा करने और गृह प्रवेश की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें निर्धारित राशि नहीं मिली है।
योजना के तहत निर्धारित अवधि में मकान पूरा करने वाले पात्र हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। भुगतान में देरी को लेकर हितग्राहियों में नाराजगी बढ़ रही है।
केंद्र से सहायता मंजूर, फिर भुगतान में देरी क्यों?
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, 9 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ के 160 BLC प्रोजेक्टों में 11,477 मकानों के लिए 68.86 करोड़ रुपये की पहली किस्त की केंद्रीय सहायता मंजूर की गई थी।
इसके अलावा जून 2026 में छत्तीसगढ़ के लिए 6,882 और 7,434 मकानों से संबंधित दूसरी किस्त की केंद्रीय सहायता जारी करने के आदेश भी दर्ज हैं।
ऐसे में हितग्राहियों के सामने सवाल है कि केंद्र से सहायता मंजूर होने के बावजूद नगरीय निकाय स्तर पर राशि उन तक पहुंचने में देरी क्यों हो रही है। हितग्राहियों को उम्मीद है कि लंबित किस्त जल्द जारी होगी, जिससे बारिश के बीच रुका हुआ मकान निर्माण फिर शुरू हो सके और अधूरे घर पूरे किए जा सकें।



