ईरान के खिलाफ अमेरिका का आर्थिक मोर्चा तेज, होर्मुज में बढ़ा तनाव

अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उसके अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क को निशाना बनाने की नई मुहिम शुरू की है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम दिया है। इस अभियान में ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर बढ़ते खतरे और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने क्षेत्र की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका का नया आर्थिक मोर्चा
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू करने का ऐलान किया। इसका उद्देश्य उन आर्थिक और वित्तीय कड़ियों को काटना है, जिनके जरिए तेहरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा और कारोबारी सहयोग मिल रहा है।
अमेरिका ने संकेत दिया है कि यह कार्रवाई केवल ईरानी संस्थाओं तक सीमित नहीं रहेगी। ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियां और वित्तीय संस्थान भी अमेरिकी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। अमेरिका पहले से ही ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी बनाए हुए है और उसने इसे लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता होने का संकेत दिया है।
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर बढ़ते खतरे ने तेल की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तेहरान ने भी संकेत दिया है कि दबाव बढ़ने पर खाड़ी से तेल की आवाजाही को लेकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कूटनीतिक प्रयास भी जारी
तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत की कोशिशें जारी हैं। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी तेहरान पहुंचे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को सामान्य करने को लेकर बातचीत की कोशिश की जा रही है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की ईरान यात्रा भी इसी व्यापक कूटनीतिक हलचल का हिस्सा मानी जा रही है।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर असर
ईरान के खिलाफ बढ़ता अमेरिकी आर्थिक दबाव, होर्मुज में समुद्री यातायात को लेकर तनाव और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने स्थिति को केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहने दिया है। इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार तक पहुंच सकता है।



