छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा ग्रीन एनर्जी का दायरा, अक्षय ऊर्जा से 2100 मेगावाट बिजली उत्पादन; 92 हजार घरों में लगे सोलर पैनल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा को इसका प्रमुख विकल्प बनाया गया है। प्रदेश में सौर ऊर्जा समेत अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों से करीब 2100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके लिए छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी ने अलग से सोलर एनर्जी शाखा भी गठित की है।
अक्षय ऊर्जा दिवस के अवसर पर प्रदेश में संचालित परियोजनाओं से साफ है कि बिजली उत्पादन में सौर और अन्य ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। पिछले दो वर्षों में अक्षय ऊर्जा से बिजली उत्पादन की क्षमता में करीब 1200 मेगावाट की वृद्धि हुई है।
92 हजार घरों की छतों पर सोलर पैनल
पीएम सूर्य घर योजना के तहत प्रदेश में रूफटॉप सोलर को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। सोलर एनर्जी शाखा के अनुसार, 19 अगस्त तक करीब 92 हजार घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इनसे लगभग 350 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।
वहीं, करीब 90 हजार सोलर प्लांट के कनेक्शन मंजूर किए जा चुके हैं। योजना के तहत पात्र परिवारों को सौर ऊर्जा अपनाने के साथ बिजली बिल में राहत मिलने का प्रावधान है। पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ भी मिल सकता है।
औद्योगिक इकाइयों में 1250 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट
प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ओपन एक्सेस के तहत करीब 1250 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट संचालित हैं। इसके अलावा घरेलू रूफटॉप सोलर से करीब 350 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
किसानों के लिए पीएम कुसुम योजना से 21 मेगावाट उत्पादन
कृषि क्षेत्र में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए पीएम कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में योजना के माध्यम से करीब 21 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
इसके साथ ही प्रदेश के कृषि फीडरों में करीब 308 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने की योजना है। इससे किसानों को दिन के समय सौर ऊर्जा के जरिए बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
राजनांदगांव में बैट्री स्टोरेज से रात में भी बिजली
राजनांदगांव में सौर ऊर्जा के साथ बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) आधारित परियोजना भी संचालित है। इसकी क्षमता करीब 100 मेगावाट बताई गई है, जबकि वर्तमान में लगभग 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
इस सिस्टम की खासियत यह है कि दिन में सौर ऊर्जा से तैयार बिजली को बैट्री में स्टोर कर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे रात के समय भी बिजली आपूर्ति में मदद मिलती है।
अक्षय ऊर्जा से बिजली उत्पादन का आंकड़ा
प्रदेश में अलग-अलग अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन हो रहा है। प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं—
- 350 मेगावाट — घरेलू रूफटॉप सोलर प्लांट
- 1250 मेगावाट — औद्योगिक इकाइयों के ओपन एक्सेस सोलर प्लांट
- लगभग 100 मेगावाट — राजनांदगांव में BESS आधारित परियोजना की क्षमता
- 21 मेगावाट — पीएम कुसुम योजना
- 195 मेगावाट — हाइडल प्लांट
- 130 मेगावाट — अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोत
इन परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
नई परियोजनाओं से और बढ़ेगी ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी
सोलर एनर्जी शाखा के अधीक्षण यंत्री एन. बिम्बसार के अनुसार, प्रदेश में सोलर और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों से करीब 2100 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। आने वाले समय में नई परियोजनाओं और कृषि फीडरों पर प्रस्तावित सोलर संयंत्रों के जरिए अक्षय ऊर्जा की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के विस्तार को घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और औद्योगिक क्षेत्र—तीनों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे एक ओर बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी प्रदेश को मजबूती मिलेगी।



