ओमान तट के पास टैंकर के निकट धमाका, सभी क्रू सदस्य सुरक्षित; हॉर्मुज स्ट्रेट में फिर बढ़ा तनाव

मस्कट/दुबई: ओमान के तट से करीब 20 समुद्री मील दूर रविवार को एक टैंकर के पास जोरदार धमाका होने से हॉर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। घटना की पुष्टि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने की है। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं और टैंकर को भी किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है।
घटना के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। UKMTO ने हॉर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री मार्गों से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी है।
उसी दिन एक अन्य जहाज पर भी हमला
रविवार को ही ओमान तट के पास एक अन्य जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया था। इस हमले में जहाज को गंभीर क्षति पहुंची और वह अनियंत्रित हो गया। लगातार हो रही इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हॉर्मुज को लेकर ईरान-ओमान वार्ता अंतिम चरण में
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कैबिनेट को जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है। वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक नया समुद्री मार्ग तय किया जाएगा। उनके अनुसार, यह मार्ग न तो पूरी तरह ईरान के तट के पास होगा और न ही पूरी तरह ओमान के अधिकार क्षेत्र में, बल्कि दोनों देशों की सहमति से संचालित होगा।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था का अर्थ हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह सामान्य रूप से खोलना नहीं है।
जहाजों की आवाजाही में आई कमी
गौरतलब है कि पिछले महीने ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने तट के निकट शिपिंग गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई थीं।
मैरीटाइम इंटेलिजेंस कंपनी केप्लर के अनुसार, हाल के दिनों में हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.



