ईरान का बड़ा पलटवार! कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा, पैट्रियट-THAAD सिस्टम निशाने पर

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान के अनुसार, इन हमलों में पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, THAAD रडार, C-RAM रडार और MQ-9 रीपर ड्रोन डिपो को निशाना बनाया गया।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।

IRGC का दावा- अमेरिकी रक्षा प्रणाली को पहुंचाया नुकसान

IRGC के अनुसार, जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों में एक THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम का रडार, एक पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और C-RAM रडार को नष्ट कर दिया गया।

ईरान ने यह भी दावा किया कि एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईंधन टैंक में आग लग गई तथा हेलीकॉप्टर हैंगर और मरम्मत सुविधा को भी नुकसान पहुंचा। IRGC ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई और उसका निशाना केवल अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे, जॉर्डन नहीं।

कुवैत के अमेरिकी एयरबेस पर भी हमले का दावा

ईरानी सेना ने ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के 23वें चरण के तहत कुवैत में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले करने का दावा किया है।

ईरान के अनुसार, हमलों में:

  • दोहा बेस के गोला-बारूद और लॉजिस्टिक्स डिपो,
  • अली अल सलेम एयर बेस के फ्यूल टैंक,
  • कैंप आरिफजान के एम्युनिशन डिपो,
  • MQ-9 रीपर ड्रोन हैंगर,
  • पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और सैन्य उपकरणों के गोदामों को निशाना बनाया गया।

अमेरिका ने भी जारी रखे सैन्य अभियान

दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसने लगातार 12वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है।

अमेरिकी सेना के अनुसार, हमलों में:

  • मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज,
  • होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एयर डिफेंस सिस्टम,
  • समुद्री सैन्य ठिकानों

को निशाना बनाया गया।

CENTCOM का कहना है कि अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिकी सेना ने यह भी बताया कि क्षेत्र में तैनात 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं।

तनाव लगातार बढ़ रहा

ईरान और अमेरिका के बीच हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों की ओर से लगातार जवाबी हमलों के दावे किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है।

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