दो साल तक नोटिस, फिर चला बुलडोजर… नकटी में शासकीय भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का खुलासा

रायपुर। नवा रायपुर के ग्राम नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है। बुलडोजर चलते समय बेघर होते परिवारों की तस्वीरों ने जहां लोगों को भावुक किया, वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि करीब दो वर्षों की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई है।
प्रशासन के अनुसार अतिक्रमणकारियों को लगातार नोटिस जारी कर शासकीय भूमि खाली करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने कब्जा नहीं छोड़ा, जिसके बाद नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
दो साल तक दिए गए नोटिस, फिर हुई कार्रवाई
अधिकारियों के मुताबिक, ग्राम नकटी में शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों को पिछले करीब दो वर्षों से कई बार नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें स्वेच्छा से भूमि खाली करने के लिए समय भी दिया गया, लेकिन अधिकांश लोगों ने कब्जा बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी दस्तावेजों की जांच पूरी कर कार्रवाई को अंजाम दिया।
कई लोगों ने हजारों वर्गफुट सरकारी जमीन पर किया था कब्जा
प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार कई लोगों ने छोटे-मोटे नहीं, बल्कि हजारों से लेकर लगभग 30 हजार वर्गफुट तक शासकीय भूमि पर कब्जा कर रखा था।
सबसे बड़े अतिक्रमणों में देवकुमार रात्रे पर 29,700 वर्गफुट, जानकी साहू पर 29,600 वर्गफुट, मुकेश पाल पर 19,800 वर्गफुट, मायाराम यादव पर 18,500 वर्गफुट, दूरपति रात्रे पर 18,300 वर्गफुट तथा मनोज साहू पर 17,200 वर्गफुट भूमि पर कब्जे का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा स्कुलू राम साहू (15,600 वर्गफुट), राजलाल ढीढी (14,400 वर्गफुट), घसिया बघेल (14,700 वर्गफुट), भूरी पाल (14,600 वर्गफुट), कला बाई पाल (12,500 वर्गफुट), घनश्याम (12,300 वर्गफुट), सेवाराम साहू (11,400 वर्गफुट), नंद कुमार कुर्रे (11,400 वर्गफुट), सोनेलाल रात्रे (11,200 वर्गफुट), पुनउ साहू (11,200 वर्गफुट), किसुन यादव (10,600 वर्गफुट), पंचू साहू (10,400 वर्गफुट) सहित कई अन्य लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं।
प्रशासन की सूची में ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जिनमें 800 वर्गफुट से लेकर 10 हजार वर्गफुट तक शासकीय भूमि पर कब्जा दर्ज किया गया है।
निजी जमीन होने का दावा, लेकिन रिकॉर्ड में नहीं मिला आधार
प्रशासन का कहना है कि कुछ लोगों ने कार्रवाई के दौरान संबंधित भूमि को अपनी निजी संपत्ति बताया। हालांकि राजस्व विभाग द्वारा वर्षों पुराने रिकॉर्ड की जांच में संबंधित जमीन पर उनके पूर्वजों का नाम दर्ज नहीं मिला। रिकॉर्ड सत्यापन के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
कार्रवाई पर छिड़ी बहस
ग्राम नकटी में हुई इस कार्रवाई के बाद एक ओर बेघर हुए परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई जा रही है, तो दूसरी ओर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा हो रही है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर सार्वजनिक उपयोग और नियोजित विकास के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है, जबकि प्रभावित परिवार पुनर्वास और राहत की मांग कर रहे हैं।
नवा रायपुर की यह कार्रवाई अब प्रदेश में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और उसके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गई है।



