40 वर्षीय महिला की ब्लड कैंसर से मौत, क्या प्रदेश में ‘साइलेंट किलर’ बन रहा है Blood Cancer?

दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ में ब्लड कैंसर के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। दुर्ग की 40 वर्षीय महिला की रायपुर एम्स में इलाज के दौरान महज चार दिन में मौत हो गई। इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ब्लड कैंसर प्रदेश में एक “साइलेंट किलर” के रूप में तेजी से फैल रहा है।
सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल पहुंची महिला
परिजनों के अनुसार महिला पूरी तरह स्वस्थ थी और पहले कभी किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं रही। करीब एक सप्ताह पहले अचानक उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, जिसके बाद दुर्ग के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें रायपुर एम्स रेफर कर दिया।
एम्स में जांच के दौरान महिला को ब्लड कैंसर होने की पुष्टि हुई। इलाज शुरू होने के बावजूद चार दिन के भीतर उनकी मौत हो गई। इस घटना ने लोगों में बीमारी को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
प्रदेश में बढ़ रहे हैं ब्लड कैंसर के मरीज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रीजनल कैंसर सेंटर, एम्स और निजी अस्पतालों में ब्लड कैंसर के मरीजों की संख्या पहले की तुलना में बढ़ी है। हालांकि राज्य स्तर पर इसके मरीजों के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अस्पतालों में रोजाना नए मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
ब्लड कैंसर क्या है?
ब्लड कैंसर खून और बोन मैरो (अस्थि मज्जा) से जुड़ी गंभीर बीमारी है। इसके मुख्य तीन प्रकार हैं—
- ल्यूकेमिया (Leukemia)
- लिम्फोमा (Lymphoma)
- मायलोमा (Myeloma)
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में इसका खतरा अधिक होता है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है।
ब्लड कैंसर के प्रमुख कारण और रिस्क फैक्टर
डॉक्टरों के मुताबिक ब्लड कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं है। इसके पीछे कई जोखिम कारक हो सकते हैं—
- जेनेटिक म्यूटेशन
- परिवार में ब्लड कैंसर की हिस्ट्री
- कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता
- अत्यधिक रेडिएशन का संपर्क
- बेंजीन जैसे हानिकारक केमिकल
- धूम्रपान
- पहले ली गई कीमोथेरेपी या कुछ विशेष दवाएं
ब्लड कैंसर के प्रमुख लक्षण
यदि निम्न लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए—
- लगातार थकान और कमजोरी
- बार-बार बुखार या संक्रमण
- आसानी से चोट लगना
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- हड्डियों और जोड़ों में दर्द
- बिना कारण वजन कम होना
- रात में अत्यधिक पसीना आना
- गर्दन, बगल या पेट में गांठ
- लिम्फ नोड्स में सूजन
- सांस लेने में तकलीफ
विशेषज्ञों की सलाह
ब्लड कैंसर एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. विकास गोयल के अनुसार, ब्लड कैंसर के प्रमुख कारणों में जेनेटिक समस्याएं और फैमिली हिस्ट्री शामिल हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में मरीजों की संख्या बढ़ी है। हानिकारक केमिकल्स और धूम्रपान से दूरी बनाकर, संतुलित आहार अपनाकर तथा खेती में कीटनाशकों का छिड़काव करते समय मास्क पहनकर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कई मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रभावी इलाज साबित होता है।
वहीं श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. देवेंद्र नायक ने बताया कि अस्पताल में बच्चों और वयस्कों दोनों में ब्लड कैंसर के मरीज लगातार आ रहे हैं। मरीजों का उपचार आवश्यकता के अनुसार कीमोथेरेपी सहित अन्य आधुनिक उपचारों से किया जा रहा है। उन्होंने लोगों को ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज खाने, नियमित व्यायाम करने और शराब से दूरी बनाने की सलाह दी।
समय पर जांच से बच सकती है जान
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यदि लगातार कमजोरी, बार-बार संक्रमण, असामान्य ब्लीडिंग या बिना कारण वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है। समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।



