छत्तीसगढ़ में 3 नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा, शासन ने जारी किया आदेश; प्रोटोकॉल तक सीमित रहेंगी सुविधाएं

रायपुर। Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के तीन नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में 2 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, विभिन्न निगम, मंडल और प्राधिकरणों में जिम्मेदारी संभाल रहे तीन पदाधिकारियों को यह दर्जा दिया गया है।
शासन के आदेश के मुताबिक संजय अग्रवाल, अजय शुक्ला और शरद अवस्थी को उनके संबंधित पदों के आधार पर राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। हालांकि, यह दर्जा प्रशासनिक या संवैधानिक अधिकारों के तौर पर नहीं, बल्कि शिष्टाचार और प्रोटोकॉल के उद्देश्य से दिया गया है।
संजय अग्रवाल को राज्य योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में दर्जा
संजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ राज्य योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। योग आयोग के माध्यम से प्रदेश में योग, स्वास्थ्य और जन-जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम किया जाता है।
अजय शुक्ला को भी राज्यमंत्री का दर्जा
अजय शुक्ला को छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। यह बोर्ड आदिवासी क्षेत्रों में पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों और औषधीय पौधों से संबंधित गतिविधियों के लिए काम करता है।
शरद अवस्थी को इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण में दर्जा
वहीं, शरद अवस्थी को इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। प्राधिकरण इंद्रावती बेसिन क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों और गतिविधियों से संबंधित है।
राज्यमंत्री का दर्जा, लेकिन नहीं मिलेंगी प्रशासनिक शक्तियां
शासन के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तीनों पदाधिकारियों को दिया गया राज्यमंत्री का दर्जा केवल शिष्टाचार और प्रोटोकॉल के लिए है। इस दर्जे के आधार पर उन्हें राज्यमंत्री के रूप में कोई अतिरिक्त संवैधानिक या प्रशासनिक शक्ति स्वतः प्राप्त नहीं होगी।
यानी राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बावजूद संबंधित पदाधिकारियों के अधिकार और कार्यक्षेत्र उनके मूल पद के अनुरूप ही रहेंगे।
संबंधित विभाग उपलब्ध कराएगा नियमानुसार सुविधाएं
आदेश के अनुसार, राज्यमंत्री के दर्जे के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक विभाग, निगम, मंडल या आयोग की होगी। प्रोटोकॉल से जुड़ी सुविधाएं शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाएंगी।
सूची के क्रम को वरिष्ठता नहीं माना जाएगा
सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि तीनों पदाधिकारियों के नाम जिस क्रम में दर्ज हैं, उसे वरिष्ठता या प्रोटोकॉल क्रम नहीं माना जाएगा। सूची का क्रम किसी पदाधिकारी की वरिष्ठता प्रदर्शित नहीं करता है।
आदेश जारी होते ही प्रभावी हुआ फैसला
शासन के आदेश के अनुसार तीनों पदाधिकारियों को राज्यमंत्री का दर्जा आदेश जारी होने की तारीख से प्रभावी माना गया है। इसके बाद संजय अग्रवाल, अजय शुक्ला और शरद अवस्थी को उनके संबंधित पदों के साथ राज्यमंत्री के दर्जे के अनुरूप प्रोटोकॉल सुविधाएं नियमानुसार मिलेंगी।



