जम्मू-कश्मीर में कुदरत का कहर: पुंछ और किश्तवाड़ में बादल फटने व भूस्खलन से 11 की मौत, 7 लापता

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के पुंछ और किश्तवाड़ जिलों में बादल फटने, मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। शनिवार देर रात शुरू हुई तेज बारिश रविवार सुबह तक जारी रही, जिससे कई इलाकों में अचानक बाढ़ और विनाशकारी भूस्खलन की घटनाएं हुईं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसों में तीन बच्चों समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

सुरनकोट में सबसे ज्यादा तबाही

पुंछ जिले की सुरनकोट तहसील इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुई है। लोअर मड़ा गांव में पहाड़ी खिसकने से एक दोमंजिला मकान पूरी तरह मलबे में दब गया। हादसे के समय मकान मालिक मोहम्मद लतीफ और उनके परिवार के सदस्य घर के अंदर मौजूद थे।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, स्थानीय पुलिस और भारतीय सेना ने संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबा हटाने के दौरान दो वर्षीय सोफियान यासिर सहित पांच लोगों के शव बरामद किए गए हैं। शेष लापता लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

किश्तवाड़ में भी बादल फटने से नुकसान

किश्तवाड़ जिले के डच्छन क्षेत्र के सुर्नू इलाके में भी बादल फटने की घटना सामने आई। हालांकि यहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन भारी मात्रा में मलबा आने से कई घरों, कृषि भूमि और स्थानीय बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

उफान पर नदियां-नाले, 200 से अधिक वाहन बहे

लगातार हो रही बारिश के कारण जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं। राजौरी जिले में शनिवार देर रात करीब तीन बजे बादल फटने जैसी स्थिति के बाद अचानक फ्लैश फ्लड आ गई। धारहाल नदी का पानी न्यू बस स्टैंड बेला क्षेत्र में घुस गया, जिससे वहां खड़े करीब 200 से 250 वाहन तेज बहाव में बह गए।

राहत एवं बचाव अभियान जारी

प्रशासन, पुलिस, सेना और आपदा राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। लापता लोगों की तलाश जारी है, जबकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मौसम विभाग ने अगले कुछ समय तक जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा केवल आधिकारिक मौसम और प्रशासनिक सलाह का पालन करने की अपील की है.

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