एम्स रायपुर में स्थापित होगा छत्तीसगढ़ का पहला सरकारी “पीडियाट्रिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट” केंद्र

बाल आयुष फाउंडेशन के साथ समझौता; थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और बाल कैंसर के मरीजों को राज्य में ही मिलेगा उन्नत उपचार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर ने छत्तीसगढ़ में पहला सरकारी अत्याधुनिक बाल अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (पीडियाट्रिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट) केंद्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए बाल आयुष फाउंडेशन के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग-MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल से राज्य के बच्चों को थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग, गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों तथा कुछ प्रकार के बाल कैंसर के उपचार के लिए अब दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

बाल अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण को थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग तथा बच्चों में होने वाले कई गंभीर रक्त विकारों और कैंसर के लिए सबसे प्रभावी तथा अनेक मामलों में स्थायी उपचार माना जाता है। अब तक छत्तीसगढ़ के मरीजों को इस उपचार के लिए मुंबई, दिल्ली सहित अन्य महानगरों का रुख करना पड़ता था, क्योंकि राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

समझौता ज्ञापन पर एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), बाल आयुष फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक ललित परमार, एम्स रायपुर के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) डी. के. त्रिपाठी तथा थैलेसीमिक्स इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष दीपक चोपड़ा ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह समझौता छत्तीसगढ़ के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए जीवनरक्षक और स्थायी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर राज्य में ऐसे उच्चस्तरीय उपचार विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो वर्तमान में किसी अन्य सरकारी संस्थान में उपलब्ध नहीं हैं।

पांच वर्ष की अवधि वाले इस समझौते, जिसे आवश्यकता के अनुसार आगे भी बढ़ाया जा सकेगा, के तहत एम्स रायपुर आवश्यक स्थान, चिकित्सा विशेषज्ञता तथा प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएगा। वहीं, बाल आयुष फाउंडेशन कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी-CSR) निधि, गैर-सरकारी संगठनों (नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन-NGO) तथा विभिन्न सरकारी अनुदानों के माध्यम से इस अत्याधुनिक केंद्र की स्थापना और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करेगा।

यह केंद्र एम्स रायपुर के चिकित्सा लाइसेंस के अंतर्गत संचालित होगा तथा इसकी चिकित्सा सेवाओं का नेतृत्व पीडियाट्रिक हीमैटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुनील जोंधले करेंगे। समझौता हस्ताक्षर समारोह में बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार गोयल, अस्पताल प्रशासन के अधिकारी, संस्थान के सभी डीन तथा अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे।

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