महादेव ऐप घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन: 6 चार्जशीट दाखिल, मुख्य सरगना समेत 72 आरोपी जांच के घेरे में

9 जुलाई 2026। देश के चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए छह नए आरोप पत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किए हैं। एजेंसी ने इस कार्रवाई में छह प्रमुख आरोपियों—असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी, विशाल आहूजा और धीरज अहूजा—को नामजद किया है। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
सीबीआई ने बताया कि इस मामले के मुख्य सरगना माने जाने वाले सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी अतिरिक्त साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। दोनों को पहले ही इस मामले में आरोपी बनाया जा चुका है।
66 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी पांच आरोप पत्र
जांच के समानांतर एक अन्य हिस्से में सीबीआई ने 66 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ पांच अतिरिक्त आरोप पत्र दाखिल किए हैं। इनमें चंद्राकर और उप्पल के अलावा कथित सट्टेबाजी सिंडिकेट के कई प्रमुख सदस्य शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, इन लोगों ने अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से छिपाने और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
देश का सबसे बड़ा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क
सीबीआई के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क भारत में अब तक सामने आए सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक है। जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का व्यापक उपयोग कर देशभर में लाखों लोगों तक अपनी पहुंच बनाई।
एजेंसी का कहना है कि सिंडिकेट ने विभिन्न राज्यों में अवैध सट्टेबाजी पैनल संचालित किए, डिजिटल विज्ञापनों के जरिए नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ा और बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार चलाया।
म्यूल अकाउंट्स के जरिए धन शोधन
जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध गतिविधियों से अर्जित रकम को पहले कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट्स’ (फर्जी या किराए के बैंक खातों) के जटिल नेटवर्क के माध्यम से वैध दिखाने का प्रयास किया गया। इसके बाद धन को विदेशों में स्थानांतरित किया गया। सीबीआई के अनुसार, जांच में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि इस अवैध कमाई का एक हिस्सा कथित रूप से कुछ लोक सेवकों को संरक्षण राशि और रिश्वत के रूप में दिया गया।
विदेश में बैठकर संचालित हो रहा था नेटवर्क
जांच एजेंसी के अनुसार, महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई प्रमुख सहयोगी कुछ वर्ष पहले भारत छोड़कर पश्चिम एशियाई देशों में चले गए थे और वहीं से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
इन आरोपियों को भारत लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सहयोग लिया जा रहा है। विदेश में मौजूद चार प्रमुख आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, भारतीय कानून के तहत उन्हें ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया भी जारी है, ताकि भारत में मौजूद उनकी संपत्तियों को जब्त किया जा सके।
जांच जारी, और पूरक आरोप पत्र की तैयारी
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी पूरे देश में फैले इस कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन तथा संभावित राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में नए तथ्य सामने आने पर आने वाले समय में और भी पूरक आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे।



